मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

आदिवासी पारधी समाज आज भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर है। शासन प्रशासन की ओर से इस समाज के विकास के लिए आज तक कोई प्रयास नहीं किया गया। ऐसे में आदिवासी पारधी महासंघ मुंबई एवं नवी मुंबई के अध्यक्ष संतोष एकनाथ पवार के प्रयासों से घनसोली, महापे एम आई डी सी की झोपड़पट्टी में निवास करने वाले आदिवासी पारधी समाज के 50 अशिक्षित बच्चों का नेरुल के एक स्कूल में प्रवेश दिलवाया । इसके अलावा इन बच्चों के खाने पीने व पढ़ाई में लगने वाली शैक्षणिक सामग्री को उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है।


बता दें कि नवी के घनसोली, महापे एम आई डी सी की झोपड़पट्टी में बड़ी संख्या में आदिवासी पारधी समाज के लोग गुजर बसर कर रहे हैं। इस समाज के अधिकतर बच्चे सिग्नल के आस पास भीख मांगकर जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे में आदिवासी पारधी समाज महासंघ मुंबई व नवी मुंबई विभाग के अध्यक्ष संतोष एकनाथ पवार ने सिग्नल के आस पास भटकने वाले बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए उनके अभिभावकों से चर्चा कर उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किया।
इस अभियान में बटू सावंत सर संतोष धुमक सर ने अहम भूमिका निभाई। इन बच्चों को शिक्षा के लिए प्रतिदिन नेरुल के स्कूल में भेजा जाएगा। वे इन बच्चों के अभिभावकों को समझाएंगे की आज के दौर में शिक्षा की कितनी आवश्यकता है? और बच्चों को स्कूल भेजेंगे। अभिभावकों को भी समझ में आएगा कि पारधी समाज शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए ।


