श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। उद्धव ठाकरे अब विधान परिषद चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनकी पार्टी ने अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।


शिवसेना (ठाकरे गुट) द्वारा अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि उद्धव ठाकरे इस बार विधान परिषद में नहीं जाएंगे। इससे पहले यह चर्चा थी कि ठाकरे खुद नामांकन दाखिल करेंगे, लेकिन नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक एक दिन पहले दानवे के नाम की घोषणा कर दी गई।


अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के अन्य सहयोगी दल—कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी—क्या रुख अपनाते हैं। कांग्रेस नेताओं ने पहले संकेत दिए थे कि अगर उद्धव ठाकरे के अलावा किसी और को उम्मीदवार बनाया गया तो वे अपना अलग उम्मीदवार उतार सकते हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरती है तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
वहीं शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पहले उद्धव ठाकरे को खुद चुनाव लड़ने का आग्रह किया गया था। हालांकि अब उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि ठाकरे जिस उम्मीदवार को समर्थन देंगे, उसे उनका साथ मिलेगा।
अंबादास दानवे छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र में शिवसेना (ठाकरे गुट) का एक प्रमुख और आक्रामक चेहरा माने जाते हैं। वे वर्तमान में विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी हैं। उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाए जाने से यह संकेत मिलता है कि पार्टी उन पर भरोसा जता रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में क्या रणनीति अपनाती हैं, क्योंकि उनके निर्णय से चुनावी मुकाबले की दिशा तय होगी।


