उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे मुश्किल में, पुणे में ज़मीन के लेन-देन की जाँच; अधिकारी निलंबित।

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मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी एक कंपनी की पुणे में ज़मीन के लेन-देन से जुड़ी सारी जानकारी माँगी गई है। लेन-देन की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर लग रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अगर कुछ भी गलत पाया गया, तो कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्क विभाग ने कोरेगांव पार्क में ४० एकड़ ज़मीन घोटाले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ स्टाम्प शुल्क की चोरी करके राज्य सरकार को धोखा देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने का फैसला किया है। इस लेन-देन में अमीडिया कंपनी शामिल है, जिसके उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ निदेशक हैं। कंपनी को ६ करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी चुकाने का नोटिस भी जारी किया गया है और नियमों के मुताबिक स्टांप ड्यूटी न वसूलने पर संयुक्त उप-पंजीयक को निलंबित कर दिया गया है।

मामले की जांच के लिए प्रभारी महानिरीक्षक पंजीकरण और स्टांप नियंत्रक सुहास दिवस ने संयुक्त महानिरीक्षक पंजीकरण राजेंद्र मुथे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है और उसे सात दिनों के भीतर एक रिपोर्ट देने को कहा गया है।

ज्ञात हो कि महार वतन में जमीन की मूल कीमत १८०० करोड़ रुपये थी, लेकिन इसे ३०० करोड़ रुपये में बेच दिया गया। साथ ही, २० मई को इस लेनदेन को पंजीकृत करते समय केवल ५०० रुपये की स्टांप ड्यूटी ली गई। वास्तव में, इस लेनदेन के लिए २० करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की आवश्यकता थी। आरोप है कि अजीत पवार के बेटे की कंपनी को सारी रियायतें दी।

इस मामले पर अजित पवार ने कहा, “बच्चे बड़े हो जाते हैं तो अपना काम खुद करते हैं। लेकिन, मैंने यह भी दावा किया कि मैंने किसी अधिकारी या किसी और से मदद नहीं मांगी।”

अजित पवार लगभग ७० हज़ार करोड़ के सिंचाई घोटाले के कारण मुश्किलों में थे। गंभीर आरोपों के बाद पवार ने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। पार्थ पवार के ज़मीन लेन-देन के कारण अजित पवार फिर से मुश्किलों में हैं। अपने बेटे की ज़मीन ख़रीद के लिए स्टाम्प ड्यूटी में रियायत देना, ज़मीन की क़ीमत कम करना, ये सब वित्त मंत्री अजित पवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

पहली नज़र में साफ़ है कि सरकारी मशीनरी ने अजित पवार के बेटे की कंपनी को ज़मीन ख़रीद में कई तरह की रियायतें दी हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ज़मीन ख़रीद के लेन-देन को रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती।

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