मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम के शैक्षणिक वर्ष 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


अभाविप का कहना है कि विधि महाविद्यालयों की मान्यता और नवीनीकरण से जुड़ी प्रशासनिक देरी का खामियाजा विद्यार्थियों को नहीं भुगतना चाहिए।अभाविप के अनुसार, हजारों विद्यार्थियों ने एलएलबी प्रवेश के लिए सीईटी परीक्षा दी और प्रवेश प्रक्रिया के आवश्यक चरण पूरे किए हैं। इसके बावजूद कुछ विधि महाविद्यालयों की मान्यता एवं नवीनीकरण प्रक्रिया लंबित होने के कारण विद्यार्थियों में अपने शैक्षणिक भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
संगठन ने कहा कि महाविद्यालयों की मान्यता और नवीनीकरण का मामला संबंधित महाविद्यालयों, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) तथा सक्षम प्राधिकरणों के बीच का प्रशासनिक विषय है। हालांकि, इसका सीधा असर विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने समय पर परीक्षा दी, कैप प्रक्रिया में भाग लिया और अपनी पसंद के महाविद्यालयों का चयन करने की तैयारी की है। ऐसे में प्रवेश के बीच मान्यता की स्थिति स्पष्ट नहीं होना उनके लिए गंभीर समस्या है।
■ विद्यार्थियों के सामने कई सवाल
अभाविप ने कहा कि विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि कौन-से महाविद्यालय प्रवेश के लिए पूरी तरह पात्र हैं, कौन-से महाविद्यालय मान्यता प्रक्रिया में हैं और आगामी कैप राउंड में किन महाविद्यालयों को शामिल किया जाएगा।संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि यदि बाद के चरण में नए महाविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो पहले से पसंदक्रम भर चुके विद्यार्थियों को अपने विकल्पों में बदलाव का समान अवसर कैसे मिलेगा। अभाविप ने प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है।
■ नए महाविद्यालय शामिल होने पर पसंद
क्रम बदलने का मौका मिलेअभाविप के मुताबिक, फिलहाल सीईटी सेल द्वारा आवश्यक मंजूरियां प्राप्त महाविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। वहीं, कुछ अन्य महाविद्यालयों के आगामी कैप राउंड में शामिल होने की संभावना है।संगठन की मांग है कि यदि मान्यता प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए महाविद्यालयों को कैप प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो पहले से पसंदक्रम दर्ज कर चुके विद्यार्थियों को भी अपने विकल्पों में संशोधन के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
■ अल्पकालीन मान्यता व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग
अभाविप ने विधि महाविद्यालयों को बीसीआई द्वारा दी जाने वाली मान्यता की अवधि को लेकर भी पुनर्विचार की मांग की है। संगठन का कहना है कि जो महाविद्यालय निर्धारित शैक्षणिक और आधारभूत मानदंडों को पूरा करते हैं, उन्हें बार-बार अल्पकालीन मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया में रखने के बजाय दीर्घकालीन मान्यता देने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।अभाविप के अनुसार, बार-बार होने वाली मान्यता और नवीनीकरण प्रक्रिया से पैदा होने वाली प्रशासनिक देरी का सीधा असर प्रवेश प्रक्रिया और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए इस व्यवस्था का स्थायी और विद्यार्थी-केंद्रित समाधान जरूरी है।
■ अभाविप की प्रमुख मांगें
अभाविप महाराष्ट्र प्रदेश ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं—-
● एलएलबी कैप प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम राउंड की अवधि तत्काल बढ़ाई जाए।
● महाराष्ट्र सरकार हस्तक्षेप कर विधि महाविद्यालयों और बीसीआई के बीच लंबित मान्यता एवं नवीनीकरण मामलों का शीघ्र समाधान करवाए।
● सीईटी सेल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बीसीआई, संबंधित विश्वविद्यालयों और विधि महाविद्यालयों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित किया जाए।
● विद्यार्थियों को पात्र महाविद्यालयों और लंबित मान्यता वाले महाविद्यालयों की अद्यतन एवं स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। बाद में नए महाविद्यालय कैप प्रक्रिया में शामिल होने पर विद्यार्थियों को अपने पसंदक्रम में संशोधन का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
● विधि महाविद्यालयों की मान्यता एवं नवीनीकरण प्रक्रिया को अधिक स्थायी, पारदर्शी और विद्यार्थी हितैषी बनाने के लिए दीर्घकालीन व्यवस्था तैयार की जाए।
■ ‘प्रशासनिक देरी की कीमत विद्यार्थी क्यों चुकाएं?’
अभाविप मुंबई महानगर मंत्री अभिषेक पवार ने कहा कि विधि शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश की न्यायव्यवस्था के भावी आधारस्तंभ हैं। विद्यार्थियों ने सीईटी परीक्षा देकर प्रवेश प्रक्रिया की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की हैं। ऐसे में महाविद्यालयों और बीसीआई के बीच मान्यता संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी के कारण विद्यार्थियों को अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी की कीमत विद्यार्थी क्यों चुकाएं?”पवार ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय मानकर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। संबंधित विधि महाविद्यालयों, बीसीआई, सीईटी सेल, विश्वविद्यालयों तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर समयबद्ध समाधान निकालना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद नहीं होना चाहिए और प्रवेश प्रक्रिया में किसी विद्यार्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।अभाविप ने स्पष्ट किया है कि मान्यता से जुड़े प्रशासनिक मामलों का जल्द समाधान किया जाए और विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को किसी भी प्रकार की अनिश्चितता के हवाले न किया जाए।


