मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में झोपड़पट्टी पुनर्विकास योजनाओं को वर्षों तक लटकाने वाले बिल्डरों के खिलाफ झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) ने बड़ी कार्रवाई की है। पिछले करीब दो वर्षों में 450 से अधिक बिल्डरों को विभिन्न रुके हुए पुनर्विकास प्रोजेक्टों से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। एसआरए की इस कार्रवाई का उद्देश्य लंबे समय से अधर में पड़े प्रोजेक्टों को नए विकासकों के जरिए आगे बढ़ाना और झोपड़पट्टीवासियों को समय पर पुनर्वासित घर उपलब्ध कराना है।


एसआरए के अनुसार, कई परियोजनाओं में विकासकों ने मंजूरी मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया या काम शुरू करने के बाद उसे बीच में ही रोक दिया। कुछ मामलों में पात्र झोपड़ीधारकों को किराया नहीं दिया गया, जबकि कई परियोजनाएं वर्षों से केवल कागजों पर ही आगे बढ़ रही थीं। ऐसी स्थिति में पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हजारों परिवारों को अस्थायी आवास और किराये की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था।
एसआरए ने ऐसे मामलों की समीक्षा के बाद संबंधित विकासकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसके तहत परियोजना से विकासक को हटाने के बाद संबंधित योजनाओं को नए विकासक के माध्यम से पूरा कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, 2021 से अगस्त 2026 तक 561 विकासकों पर कार्रवाई की गई है, जबकि पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक विकासकों को हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। कार्रवाई महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र अधिनियम, 1971 की धारा 13(2) के तहत की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में सबसे अधिक 243 परियोजनाएं ऐसी थीं, जिनमें विकास कार्य ठप या बेहद धीमी गति से चल रहा था। एसआरए अब इन अटकी हुई परियोजनाओं में नए विकासकों की नियुक्ति कर उन्हें दोबारा गति देने की दिशा में काम कर रहा है।
इस कार्रवाई से उन झोपड़ीधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने पक्के पुनर्वास घर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एसआरए का लक्ष्य आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में पुनर्वास आवासों का निर्माण पूरा करना है। ऐसे में परियोजनाओं को जानबूझकर लंबित रखने वाले विकासकों पर कार्रवाई को पुनर्वास प्रक्रिया में जवाबदेही और गति लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


