ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने पीएम मोदी से की अपील: ‘वैश्विक आर्थिक संकट से बचाएं फिल्म उद्योग और दैनिक श्रमिकों का भविष्य’।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर भारतीय फिल्म उद्योग और उससे जुड़े लाखों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, तकनीशियनों व जूनियर आर्टिस्टों के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कोविड-19 महामारी के बाद उपजे आर्थिक संकट और वर्तमान में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के तनाव के कारण फिल्म जगत पर मंडराते खतरों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।

1. कोविड-19 की मार से अब तक नहीं उबर पाया फिल्म जगतपत्र में कहा गया है कि भारतीय फिल्म उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। हालांकि, यह क्षेत्र अभी भी कोरोना महामारी के दौरान हुए भारी वित्तीय नुकसान से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।

महामारी के दौरान 60% से 70% श्रमिकों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। बचे हुए लोगों को आधी से भी कम सैलरी, बेहद कम मैनपावर और ज्यादा घंटों तक काम करने पर मजबूर होना पड़ा। कई कुशल कारीगरों और कलाकारों को पेट पालने के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने, सिक्योरिटी गार्ड, डिलीवरी बॉय और रेहड़ी-पटरी लगाने जैसे कम आय वाले काम करने पड़े। कई छोटे और मध्यम प्रोडक्शन हाउस स्थायी रूप से बंद हो गए।

2. वर्तमान वैश्विक संकट और बढ़ती महंगाई की नई चुनौतीएसोसिएशन ने प्रधानमंत्री का ध्यान वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों की ओर खींचते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट, ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बढ़ती कीमतों, महंगे ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स चार्ज और वैश्विक आर्थिक मंदी ने फिल्म उद्योग की कमर तोड़ दी है। बढ़ती लागत के कारण फिल्मों, टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज के निर्माण में भारी गिरावट आने की आशंका है। निवेश घटने से एक बार फिर लाखों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बेरोजगारी और भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं।

पत्र में भावुक लहजे में कहा गया है, “दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी तभी तक जीवित रहता है जब तक उसे रोज काम मिलता है। यदि काम रुकता है, तो उसके घर का चूल्हा भी बुझ जाता है।”

3. ‘विदेशी लोकेशंस’ की जगह ‘भारतीय लोकेशंस’ को प्राथमिकता देने की मांगAICWA ने एक बड़ा सुझाव देते हुए अपील की है कि पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को देखते हुए भारतीय फिल्म निर्माताओं को विदेशों में होने वाली अनावश्यक शूटिंग (Foreign Shoots) से बचना चाहिए। इसके बजाय भारत की विश्वस्तरीय और खूबसूरत शूटिंग लोकेशंस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, बल्कि देश के प्रोडक्शन इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।

4. बड़े स्टार्स और प्रोडक्शन हाउस से फीस घटाने की अपीलएसोसिएशन ने कहा है कि आर्थिक संकट का सबसे बड़ा बोझ हमेशा निचले तबके के श्रमिकों पर डाला जाता है, जो कि सरासर गलत है। AICWA ने मांग की है कि किसी भी परिस्थिति में श्रमिकों और तकनीशियनों के वेतन में कटौती नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय फिल्मों के बड़े स्टार्स, बड़े प्रोडक्शन हाउस और आर्थिक रूप से मजबूत हितधारकों को अपनी अत्यधिक फीस (Remuneration) और गैर-जरूरी खर्चों को कम करना चाहिए, ताकि निचले स्तर के कामगारों के वेतन और सम्मान की रक्षा हो सके।

5. सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगेंAICWA ने केंद्र और राज्य सरकारों से मिलकर ठोस नीति बनाने का आग्रह किया है:

दीर्घकालिक और श्रमिक-अनुकूल नीतियां:सरकार फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों, श्रमिकों, निर्माताओं, थिएटर मालिकों और OTT प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर एक जिम्मेदार नीति तैयार करे।

‘फिल्म उद्योग श्रमिक कल्याण आपातकालीन कोष’: सभी राज्य सरकारों को अपने स्तर पर एक समर्पित वेलफेयर फंड (Emergency Fund) बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि किसी भी आपदा या आर्थिक संकट के समय इन अनऑर्गेनाइज्ड (असंगठित) सेक्टर के श्रमिकों को वित्तीय व मानवीय सहायता मिल सके।”भारतीय सिनेमा की रीढ़ केवल इसके सितारे और स्टूडियोज नहीं हैं, बल्कि पर्दे के पीछे दिन-रात बिना थके काम करने वाला वह अदृश्य वर्कफोर्स (श्रमिक) है जो हर दिन पसीना बहाता है।”

सुरेश श्यामलाल गुप्ता, अध्यक्ष (AICWA) के इस पत्र की प्रतिलिपियाँ केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।

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