कारगिल नगर, बना कचरा नगर।

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रवीन्द्र मिश्रा । मुंबई वार्ता

90 के दशक में हुई भारत पाकिस्तान की लड़ाई में सुर्खियों में आया कारगिल जो अपनी शौर्य वीरता के लिए जाना गया। वहीं उसके नाम पर नालासोपारा पूर्व में बसा कारगिल नगर अपनी गंदगी और कचरे के लिए सुर्खियों में है ।लोग अब वहां की गंदगी को देखते हुए उसे अब कचरा नगर कहने लगे हैं ।जगह जगह लगे कचरे के अंबार और खुले नाले में जमा कचरे की वजह से लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है । हवा के साथ आ रही गटर की बदबू ने जहां रहने वालों का जीना दुश्वार कर दिया है । वहीं गटर के पास खेलते बच्चे भी कभी किसी अनहोनी का शिकार भी हो सकतें हैं ।

वसई -विरार नगर पालिका के प्रभाग क्रमांक 18 कारगिल नगर के वर्तमान नगर सेवक गंगेश्वर लाल श्रीवास्तव उर्फ संजू भैया से जब इस गंदगी के विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब से मैं नगर सेवक बना हूं ।इस विषय में कई बार पत्र व्यवहार कर चुका हूं । यहां तक कि महासभा की बैठक में भी महापौर तथा आयुक्त का ध्यान भी आकर्षित कर चुका हूं। लेकिन आश्वासन के शिवाय कुछ नहीं मिला।इस विभाग में न तो कचरा रखने के लिए कोई डस्ट बिन है और ना ही कोई अन्य सुविधा।इस विभाग में एक ही कचरा की गाड़ी है।जो बाहर बाहर का ही कचरा उठातीं है ।जब कि कारगिल नगर में 10 से अधिक छोटी छोटी गोलियां है । वहां का कचरा उठाने के लिए छोटी छोटी मिनी कचरा गाड़ी की भी मांग नगर पालिका से की गई है ।

इस मामले में इस विभाग की पूर्व नगर सेविका सरिता दूबे ने कहा कि पहले यह वार्ड क्रमांक 67 था । लेकिन जब से चार चार वार्ड का एक प्रभाग बनाया गया तब यह प्रभाग क्रमांक 18 हुआ। यहां 2015 के बाद कोई चुनाव नहीं हुआ। 2016 में हुए टैंडर के हिसाब से ही यहां का कारोबार चल रहा था। पिछली बार यहां 67 लाख का टैंडर हुआ था। पिछले पांच साल प्रशासन ही नगर पालिका चला रहा था। कारगिल नगर की साफ़ सफाई के लिए हमारी ओर से बारंबार पत्र व्यवहार किया । कोई जवाब नहीं। अधिकारी मनमानी करते हैं। यहां के कचरे की शिकायत को लेकर पूर्व आयुक्त अनिल पवार के साथ कई बैठकें भी हों चुकीं। लेकिन आश्वासन के शिवाय कुछ नहीं मिला। लेकिन इस बार इस प्रभाग के लिए 1 करोड़ 65 लाख रुपए की राशि मंजूर की गई है ।अब नये टैंडर के बाद यहां की रुप रेखा अवश्य बदलेगी। ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।

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