■ किसान कर्जमाफी की फाइल पर दस्तख़त करने में देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार के हाथों को लकवा मार गया है क्या?
■ कितने किसानों की बलि लेने के बाद कर्जमाफी का सही समय आएगा?
मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य में रोज़ाना 6 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन भाजपा गठबंधन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। राज्य की सरकार केवल गैंडे की खाल जैसी मोटीचमड़ी की ही नहीं, बल्कि अंधी, गूंगी और बहरी भी है। इस सरकार को भ्रष्टाचार के आगे किसानों का दुख दिखाई ही नहीं देता। भाजपा गठबंधन की सरकार किसान विरोधी है। अदानी-अंबानी की फाइलों पर दस्तख़त करने वाले देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार के हाथ किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर दस्तख़त करने में लकवाग्रस्त हो जाते हैं क्या? ऐसा तीखा सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने उठाया है।


किसानों के मुद्दों पर भाजपा गठबंधन सरकार को घेरते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने आगे कहा कि, अहमदनगर ज़िले के नेवासा तालुका के किसान बाबासाहेब सुभाष सरोदे ने कर्ज़ के बोझ से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
आत्महत्या से पहले अपने मोबाइल में बनाए गए वीडियो में सरोदे ने कहा, “कर्जमाफी होकर कर्जमुक्त हो जाऊँगा, इस आशा पर जी रहा था, इस सरकार में ग़रीब किसान के लिए कुछ नहीं है, इसलिए मुझे आत्महत्या करने की नौबत आई।” यह सुनकर मन सुन्न हो गया, लेकिन देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आज भी निर्लज्जतापूर्वक कहा जाता है कि “सही समय पर किसान कर्जमाफी करेंगे”, लेकिन वह सही समय कितने किसानों की बलि लेने के बाद आएगा?बाबासाहेब सरोदे जैसे किसान रोज़ाना अपनी जान दे रहे हैं। मायबाप सरकार की मदद की आस पर जीने वाला गरीब किसान सरकार की धोखाधड़ी से निराश और हताश हो चुका है।
खेती के लिए ज़रूरी बीज, खाद, डीज़ल भाजपा सरकार ने महंगे कर दिए, फ़सल को उचित दाम नहीं मिलता, प्रकृति भी साथ नहीं देती। साल में 6 हज़ार रुपये किसानों के मुँह पर फेंककर बहुत कुछ कर दिया, ऐसी बातें करने वाली भाजपा गठबंधन सरकार केवल मलाई खाने में व्यस्त है। “किसान भाइयों, इस निर्दयी सरकार के भरोसे मत रहो, आत्महत्या मत करो, अपने बच्चों और परिवार का ख्याल रखो”, ऐसा भावपूर्ण आह्वान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया है।


