मुंबई वार्ता संवाददाता

11वीं कक्षा की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कुणबी प्रमाणपत्रधारी छात्रों को नॉन-क्रीमी लेयर और डोमिसाइल प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिलने से हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ गया है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश प्रवक्ता एवं युवक मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


मातेले ने अपने ज्ञापन में कहा कि कुणबी प्रमाणपत्रधारी विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए आवश्यक नॉन-क्रीमी लेयर और डोमिसाइल प्रमाणपत्र प्राप्त करने हेतु राजस्व विभाग की ‘सरोवर’ प्रणाली पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन पिछले कई सप्ताह से यह प्रणाली बेहद धीमी गति से काम कर रही है और बार-बार बंद हो रही है। इसके कारण आवेदन जमा करने, रसीद प्राप्त करने, दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने और प्रमाणपत्र डाउनलोड करने जैसी सभी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई छात्रों और अभिभावकों ने समय पर आवेदन किया है, लेकिन शासन की तकनीकी खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। अनेक विद्यार्थी रोजाना महा ई-सेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। कई अभिभावकों के पास आवेदन क्रमांक और ऑनलाइन रिकॉर्ड होने के बावजूद कई जूनियर कॉलेज मूल प्रमाणपत्र के बिना प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं।
मातेले ने कहा कि छात्रों की कोई गलती नहीं है। उन्होंने समय पर आवेदन और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं, फिर भी सरकारी प्रणाली की कमियों के कारण उनका भविष्य दांव पर लग गया है। ग्रामीण क्षेत्रों, किसान परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रवेश प्रक्रिया की समय-सीमा समाप्त होने के कारण किसी छात्र का प्रवेश छूट जाता है तो इसके शैक्षणिक, सामाजिक और मानसिक दुष्परिणाम लंबे समय तक रह सकते हैं। वर्तमान में कई विद्यार्थी और उनके अभिभावक तनाव और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।
प्रमुख मांगें
■ एडवोकेट अमोल मातेले ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
नॉन-क्रीमी लेयर और डोमिसाइल प्रमाणपत्र जमा करने के लिए कम से कम तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी जाए।
अभिभावकों के शपथपत्र (अंडरटेकिंग) के आधार पर छात्रों को अस्थायी प्रवेश देने के निर्देश सभी जूनियर कॉलेजों को जारी किए जाएं।
महा ई-सेवा केंद्र की रसीद, आवेदन क्रमांक, ऑनलाइन आवेदन का प्रमाण या स्क्रीनशॉट को अस्थायी वैध दस्तावेज माना जाए।
केवल प्रमाणपत्र लंबित होने के आधार पर किसी भी छात्र का प्रवेश रद्द या अस्वीकार न किया जाए।
राजस्व और शिक्षा विभाग की संयुक्त समन्वय समिति बनाकर तत्काल निर्णय लिए जाएं।
‘सरोवर’ प्रणाली की तकनीकी समस्याओं को युद्धस्तर पर दूर कर लंबित आवेदनों का विशेष अभियान चलाकर निपटारा किया जाए।
■ आंदोलन की चेतावनी
मातेले ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो छात्रों के हित में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रशासनिक तथा तकनीकी विफलताओं का बोझ छात्रों पर नहीं डाला जा सकता।
उन्होंने सरकार से अपील की कि इस विषय को केवल प्रशासनिक समस्या न मानकर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा समझा जाए, ताकि किसी भी छात्र का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो और कुणबी समाज के विद्यार्थियों को न्याय मिल सके।


