श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मानसून के आगमन से पहले डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी की संभावना के बीच मुंबई के केईएम अस्पताल की ब्लड बैंक में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रक्त घटक तैयार करने वाली मशीन खराब होने के कारण पिछले दो महीनों से प्लेटलेट्स और फ्रोजन प्लाज्मा का उत्पादन लगभग पूरी तरह बंद पड़ा है। इससे मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


जानकारी के अनुसार, मई 2026 में केईएम ब्लड बैंक में रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी), सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) और फ्रोजन प्लाज्मा की एक भी यूनिट तैयार नहीं की गई। इस अवधि में अस्पताल को 542 पैक्ड रेड सेल यूनिट अन्य सरकारी ब्लड बैंकों से मंगवानी पड़ीं, जबकि करीब 500 यूनिट निजी स्रोतों से प्राप्त करनी पड़ीं। अप्रैल महीने में भी केवल 12 आरडीपी यूनिट तैयार हुई थीं, जबकि एसडीपी का उत्पादन शून्य रहा।
इसके विपरीत मार्च 2026 में केईएम अस्पताल ने करीब 500 आरडीपी और 1,000 फ्रोजन प्लाज्मा यूनिट्स मरीजों को उपलब्ध कराई थीं, जिससे इन रक्त घटकों की भारी मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है। बावजूद इसके, पिछले दो महीनों से इनका उत्पादन पूरी तरह ठप है।


■ पर्याप्त स्टाफ के बावजूद उत्पादन बंद
केईएम ब्लड बैंक में 28 तकनीशियन और दो तकनीकी पर्यवेक्षक कार्यरत हैं। इतनी बड़ी मानव संसाधन क्षमता होने के बावजूद रक्त घटकों का उत्पादन लंबे समय तक बंद रहना और रक्त भंडार का लगातार घटते जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
■ मरीजों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
सरकारी ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स और फ्रोजन प्लाज्मा लगभग 300 रुपये में उपलब्ध होते हैं। लेकिन उत्पादन बंद होने की स्थिति में मरीजों के परिजनों को निजी ब्लड बैंकों का सहारा लेना पड़ता है, जहां एक यूनिट के लिए 400 से 700 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
■ केवल 77 यूनिट रक्त शेष
केईएम अस्पताल के मौजूदा रक्त भंडार की स्थिति भी चिंताजनक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
ए पॉजिटिव – 24 यूनिट
ए निगेटिव – 2 यूनिट
बी पॉजिटिव – 12 यूनिट
बी निगेटिव – 1 यूनिट
एबी पॉजिटिव – 15 यूनिट
एबी निगेटिव – 2 यूनिट
ओ पॉजिटिव – 21 यूनिट
ओ निगेटिव – 0 यूनिट
इस प्रकार सभी रक्त समूहों को मिलाकर केवल 77 यूनिट रक्त उपलब्ध है। जबकि केईएम अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 100 यूनिट रक्त का वितरण होता है। यानी मौजूदा भंडार एक दिन की आवश्यकता से भी कम है।
■ शताब्दी अस्पताल में भी हालात गंभीर
कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल की ब्लड बैंक में भी रक्त का गंभीर अभाव है। वहां ए पॉजिटिव 3, बी पॉजिटिव 3, एबी पॉजिटिव 1 और ओ पॉजिटिव 6 यूनिट सहित कुल केवल 13 यूनिट रक्त उपलब्ध है। प्रसूति और दुर्घटना पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञ इस स्थिति को बेहद चिंताजनक मान रहे हैं।
मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच रक्त और प्लेटलेट्स की कमी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग तेज हो रही है।


