मुंबई वार्ता संवाददाता

मानसून के आगमन में हो रही देरी और जलाशयों में तेजी से घटते जल भंडार को देखते हुए मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की चिंता बढ़ गई है। शहर को पानी उपलब्ध कराने की चुनौती के बीच बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने अधिकारियों को मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित कुओं का सर्वेक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।


महापालिका मुख्यालय में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक विभाग में मौजूद कुओं की जांच कर यह पता लगाया जाए कि वहां उपलब्ध पानी का उपयोग स्थानीय आवासीय सोसायटियों और नागरिकों के लिए किया जा सकता है या नहीं। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और हाउसिंग सोसायटियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।
■ मुंबई में 8 हजार से अधिक कुएं
बीएमसी के अनुसार, मुंबई में 8,000 से अधिक कुएं मौजूद हैं, जिनमें दक्षिण मुंबई में ही करीब 200 से 250 कुएं शामिल हैं। पुराने चॉल क्षेत्रों में बने कई कुओं का पानी आज भी स्थानीय निवासी उपयोग कर रहे हैं। अब इन्हीं जल स्रोतों को आपातकालीन विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
■ केवल 12 प्रतिशत पानी बचा
मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले सात जलाशयों में से एक जलाशय लगभग सूख चुका है, जबकि शेष छह जलाशयों में कुल मिलाकर केवल 12 प्रतिशत जल भंडार बचा है। 11 जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
मोडक सागर : 41,828 मिलियन लीटर (32%)
तानसा : 10,368 मिलियन लीटर (7%)
मध्य वैतरणा : 28,022 मिलियन लीटर (14%)
भातसा : 81,252 मिलियन लीटर (14%)
विहार : 12,011 मिलियन लीटर (43%)
तुलसी : 1,984 मिलियन लीटर (24%)
कुल जल भंडार : 1,75,465 मिलियन लीटर (12%)
■ एक सप्ताह में तैयार होगी रिपोर्ट
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार से विभागवार सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। इसमें कुओं में उपलब्ध पानी की मात्रा, उसकी उपयोगिता और गुणवत्ता का अध्ययन कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। साथ ही बोरवेल और अन्य वैकल्पिक जल स्रोतों की अद्यतन जानकारी भी एकत्र की जाएगी।
■ जल प्रबंधन बड़ी चुनौती
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण जल प्रबंधन लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने आवासीय सोसायटियों से भी आगे आकर वैकल्पिक जल स्रोतों के उपयोग पर विचार करने की अपील की है।
मानसून में देरी और जलाशयों में घटते भंडार को देखते हुए मुंबई में आने वाले दिनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है, जिसके मद्देनजर बीएमसी अब पारंपरिक जल स्रोतों को भी सक्रिय करने की तैयारी में जुट गई है।


