मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने कैंसर मरीजों को बड़ी राहत देते हुए महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत महंगी पीईटी-सीटी (पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी–कंप्यूटेड टोमोग्राफी) जांच को शामिल करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस फैसले से कैंसर के मरीजों पर महंगी जांच का आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।


पीईटी-सीटी जांच को 63 कैंसर उपचार पैकेज में अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के रूप में शामिल किया गया है, जबकि 13 प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए इसे स्वतंत्र या प्राथमिक जांच प्रक्रिया के रूप में भी मंजूरी दी गई है।इस संबंध में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को शासनादेश जारी किया है। यह निर्णय कैंसर की सही पहचान, बीमारी के चरण का निर्धारण और उपचार के परिणामों की निगरानी करने में पीईटी-सीटी जांच की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस जांच का खर्च अधिक होने के कारण कई मरीज इसे टाल देते हैं या जांच नहीं करा पाते। इससे बीमारी की स्थिति का सही आकलन करने और समय पर उपचार की योजना बनाने में देरी होती है। मरीजों और योजना से संबद्ध अस्पतालों की ओर से लंबे समय से इस जांच को स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने की मांग की जा रही थी।सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर के निर्देश पर इस विषय का अध्ययन करने के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की गई थी। समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे कैंसर का निदान और उपचार अधिक सुलभ, समयबद्ध तथा किफायती बनाने में मदद मिलेगी।
■ 63 उपचार पैकेज में जांच की सुविधा
सरकार के निर्णय के अनुसार, पीईटी-सीटी जांच को अतिरिक्त जांच प्रक्रिया के रूप में शामिल करने वाले कैंसर उपचार पैकेज की संख्या पहले के 44 से बढ़ाकर 63 कर दी गई है। इसके अलावा, चिकित्सकीय रूप से उपयोगी माने गए 13 चयनित प्रकार के कैंसर उपचारों के लिए इस जांच को स्वतंत्र या नियमित प्राथमिक जांच प्रक्रिया के रूप में मंजूरी दी गई है।शासनादेश में विभिन्न प्रकार की पीईटी-सीटी जांच के लिए निर्धारित दरें भी तय की गई हैं। पूरे शरीर की पीईटी-सीटी जांच के लिए 20,400 रुपये, मस्तिष्क की जांच के लिए 14,650 रुपये, गैलियम-68 जांच के लिए 15,000 रुपये और हृदय संबंधी जांच के लिए 9,400 रुपये की दर निर्धारित की गई है। संबद्ध अस्पतालों को शासनादेश में तय शर्तों और दरों का सख्ती से पालन करना होगा।
■ जांच से पहले चिकित्सकीय मंजूरी अनिवार्य
पीईटी-सीटी जांच कराने के लिए संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक को इसकी चिकित्सकीय आवश्यकता प्रमाणित करनी होगी। इसके साथ ही, संबंधित मान्यता प्राप्त अस्पताल में जरूरी तकनीकी सुविधाएं, उपकरण, योग्य कर्मचारी और अपना पीईटी-सीटी केंद्र होना अनिवार्य होगा।जांच से पहले आवश्यक मंजूरी लेना और संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेज जमा करना भी जरूरी होगा। योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य स्वास्थ्य गारंटी सोसायटी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की टीएमएस 2.0 प्रणाली में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से कैंसर मरीजों को बीमारी की सही अवस्था में पहचान करने, समय पर उपचार शुरू करने और महंगी जांच पर अपनी जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।
■ निजी अस्पतालों में मराठी और अंग्रेजी में प्रदर्शित करनी होगी उपचार सेवाओं की दर सूची,महाराष्ट्र सरकार का निर्देश
मरीजों को इलाज से पहले मिल सकेगी खर्च की जानकारी, नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाईमुंबई, 17 अक्टूबर। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए उपचार सेवाओं तथा उपलब्ध सुविधाओं की दर सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से निर्देश दिया है कि अस्पताल परिसर में ऐसे स्थान पर दर सूची लगाई जाए, जहां मरीज और उनके परिजन इसे आसानी से देख सकें।इस निर्णय का उद्देश्य मरीजों और उनके परिवारों को इलाज पर होने वाले संभावित खर्च की जानकारी पहले से उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार चिकित्सा खर्च की योजना बना सकें।
यह निर्देश केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों के अनुरूप दिया गया है। इसके तहत मुंबई नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम, 1949 के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को महाराष्ट्र नर्सिंग होम नियम, 2021 की अनुसूची तीन में उल्लिखित सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रदर्शित करनी होंगी। इन नियमों के अनुसार, चिकित्सकीय सेवाओं और अस्पताल की सुविधाओं की दर सूची प्रदर्शित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
■ मराठी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगी दर सूची
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों को दर सूची मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में प्रदर्शित करनी होगी। इसे अस्पताल परिसर में ऐसे प्रमुख स्थानों पर लगाया जाना चाहिए, जहां मरीजों और उनके परिजनों की आसानी से पहुंच हो और वे दरों को स्पष्ट रूप से देख सकें।यदि अस्पताल किसी सेवा या सुविधा की कीमत में बदलाव करता है, तो दर सूची को तत्काल अद्यतन करना होगा। इसका उद्देश्य मरीजों को पुरानी या गलत दरों के आधार पर होने वाली परेशानी से बचाना है।
■ पंजीकरण और बिलिंग काउंटर पर देनी होगी जानकारी
सरकार ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि मरीजों को विभिन्न चिकित्सा सेवाओं, जांचों और उपचार पैकेज की लागू दरों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी जाए, ताकि भुगतान को लेकर विवाद और शिकायतें कम हों।अस्पतालों के पंजीकरण काउंटर, पूछताछ केंद्र और बिलिंग काउंटर पर तैनात कर्मचारियों को मरीजों तथा उनके परिजनों को निर्धारित शुल्क और उपचार की दरों के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन देना होगा।इसके अलावा, चिकित्सा वीजा या आयुष वीजा पर भारत में उपचार कराने आने वाले विदेशी मरीजों को सेवाएं देने वाले अस्पतालों को उनके लिए लागू विशेष उपचार पैकेज की दरें भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होंगी।
■ नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
शासनादेश में अस्पतालों के पंजीकरण, नियमन और निगरानी के लिए जिम्मेदार सक्षम अधिकारियों को समय-समय पर यह जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सभी जिला शल्य चिकित्सकों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और महानगरपालिका के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के निजी अस्पतालों तथा अन्य चिकित्सा संस्थानों तक इस परिपत्र की जानकारी पहुंचाने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सरकार के इस कदम से मरीजों को उपचार से पहले खर्च की जानकारी मिलने, अस्पतालों में शुल्क संबंधी पारदर्शिता बढ़ने और बिलिंग को लेकर होने वाली शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है।


