कौन हैं जयपुर की गुनगुन? मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ ऐसा क‍िया डांस क‍ि पीएम मोदी का आ गया लेटर।

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■ 12 साल की बच्ची की अद्भुत कला ने बांधा समां, मीनाक्षी शेषाद्रि भी देखती रह गईं, PM मोदी से मिला प्रशस्ति पत्र.

सतीश सोनी/मुंबई वार्ता

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 12 साल की गुनगुन मिश्रा ने अपनी कला से ऐसा समां बांधा कि हर कोई उनकी प्रतिभा का कायल हो गया। गुनगुन के नृत्य प्रदर्शन ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि प्रसिद्ध अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि को भी प्रभावित किया।

उनकी इस अद्भुत कला को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुनगुन को एक विशेष प्रशस्ति पत्र भेजकर सम्मानित किया।जयपुर की रहने वाली गुनगुन मिश्रा (विनिध्या मिश्रा) ने अपनी प्रतिभा से यह साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। उनकी नृत्य प्रस्तुति ने गीता महोत्सव में एक अलग ही रंग भर दिया। गुनगुन ने मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ मंच साझा किया और उनकी भावपूर्ण मुद्राओं और लयबद्ध कदमों ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

■ कला और शिक्षा का अद्भुत संगम:

गुनगुन न केवल एक प्रतिभाशाली नृत्यांगना हैं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल हैं। वह वर्तमान में जयपुर में कक्षा 7 की छात्रा हैं और उन्होंने कक्षा 6 में A1 ग्रेड प्राप्त किया था। भरतनाट्यम, कथक और भारतीय सांस्कृतिक कला में उनकी गहरी रुचि है।

● प्रधानमंत्री का सम्मान:

गुनगुन की इस अद्भुत कला से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक विशेष प्रशस्ति पत्र भेजा। यह सम्मान उनकी प्रतिभा और समर्पण का प्रतीक है, और यह दर्शाता है कि गुनगुन ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

● डिजिटल दुनिया में भी गुनगुन का जलवा:

गुनगुन ने कोविड-19 महामारी के दौरान एक यूट्यूब चैनल शुरू किया, जिसके वीडियो को लाखों व्यूज मिले हैं। इंस्टाग्राम पर भी उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। 2019 में, उन्होंने थाईलैंड के बैंकॉक में एक अंतर्राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में भी भाग लिया था, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

● परिवार का समर्थन:

गुनगुन की सफलता में उनके परिवार का अहम योगदान है। उनके पिता, विवेक मिश्रा, एक NEET कोचिंग शिक्षक हैं, और उनकी मां, निधि मिश्रा, एक गृहिणी हैं। उन्होंने हमेशा गुनगुन को प्रोत्साहित किया और उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद की।

● भविष्य के सपने:

गुनगुन का सपना है कि वह भारत की सांस्कृतिक राजदूत बनें और भारतीय कला और परंपरा को दुनिया भर में पहचान दिलाएं। उनकी प्रतिभा और लगन को देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि वह निश्चित रूप से अपने सपनों को साकार करेंगी। गुनगुन की कहानी उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणादायक है, जो अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं।

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