डाॅ धीरज फूलमती सिंह/स्तंभकार/मुंबई वार्ता

एक महीने से गर्मी की दस्तक हो चुकी है। वक्त से पहले इतनी ज्यादा गर्मी पड़ रही है कि लोगों का जीना मुहाल हो गया है। वहीं बढ़ती गर्मी अपने साथ कई दिक्कतें भी लाती है। गर्मियों के आते ही गर्मी में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थो की मांग बढ़ जाती है। लोग आइसक्रीम और सलाद का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना शुरू कर देते हैं मगर क्या आप जानते हैं कि हीटवेव से ज्यादा खतरा आपको खाद्य जनित बीमारियों से हो सकता है ?


खाने की कई चीजों में हानिकारक कीटाणु होते हैं, जो भोजन को दूषित करते हैं और आपको बीमार कर सकते हैं।गर्मी के मौसम में हीट स्ट्रोक, डायरिया, उल्टी, बेहोशी के साथ एक और जो सबसे कॉमन समस्या है वो है फूड पॉइजनिंग! दरअसल गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के चलते बैक्टीरिया और खतरनाक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं, जो खाने को आसानी से संक्रमित कर सकते हैं। खासकर बाहर ठेले पर बिकने वाले खाद्य पदार्थ।
सुबह का बना खाना शाम तक होते होते खराब होने लगता है। वहीं इस मौसम में अक्सर हम बाहर का कुछ भी खाते पीते रहते हैं और बाहर का खाना अक्सर अपनी स्वच्छता के चलते सवालों के घेरे में रहता है। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहता है। अगर आप भी चाट,पकोड़े, समोसे और गोलगप्पे खाते रहते हैं, तो आपको भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा कई बार अशुद्ध पानी भी फूड पॉइजिंग की वजह बन सकता है।
सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक, फल, मीट और सब्जियों से फूड पॉइजनिंग होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। फ़ूड पॉइज़निंग एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। यह तब होता है जब हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को दूषित कर देते हैं। फूड पॉइजनिंग पाचन संबंधी एक स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण पाचन तंत्र भोजन को पचा नहीं पाता है। फूड पॉइजनिंग की वजह से मरीज को पेट में दर्द, उल्टी, मितली, डायरिया और भूख कम लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बूढ़े लोगों को फूड पॉइजनिंग का शिकार होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। खाद्य जनित बीमारियों को रोकने के सबसे सरल और सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है भोजन को ठीक से धोना। कुछ खाद्य पदार्थ विशेष रूप से रोगजनकों को आश्रय देने के लिए प्रवण होते हैं यदि उन्हें अच्छी तरह से धोया न जाए,तो फ़ूड पॉइज़निंग का कारण बन सकती हैं।
पशु आधारित कच्चे खाद्य पदार्थों के दूषित होने की सबसे अधिक संभावना है। इसका मतलब यह है कि अगर आप कच्चा या अधपका मांस और चिकन, कच्चे या हल्के पके हुए अंडे, कच्चा दूध और कच्ची मछली का सेवन करते हैं, तो आपको फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता हैअंडा प्रोटीन का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे सस्ता श्रोत होता है। पोल्ट्री फार्म जनित आम तौर पर रोज खाये जाने वाले अंडे में साल्मोनेला नामक एक जर्म हो सकता है जो आपको बीमार कर सकता है। भले ही अंडा साफ और बिना फटा दिखे लेकिन ऐसा हो सकता है। कच्चे या अधपके अंडे से रेसिपी तैयार करते समय पास्चुरीकृत अंडे और अंडे के उत्पादों का उपयोग करें। अंडे को तब तक पकाएं जब तक कि जर्दी और सफेद हिस्सा सख्त न हो जाएं।आप कच्चे (अनपास्चराइज्ड) दूध और उससे बने उत्पादों से बहुत बीमार हो सकते हैं।
इन चीजों में सॉफ्ट चीज़,पनीर,आइसक्रीम और दही भी शामिल हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कच्चा दूध हानिकारक कीटाणुओं से भरा हो सकता है, जिनमें कैम्पिलोबैक्टर, क्रिप्टोस्पोरिडियम, ई. कोलाई, लिस्टेरिया और साल्मोनेला शामिल हैं। आपको कच्चा दूध पीने से बचना चाहिए या कच्चे दूध से बनी हुई चीजे खाने से परहेज करना चाहिए। ताजे फल और सब्जियां खाने से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं, लेकिन कभी-कभी कच्चे फल और सब्जियां साल्मोनेला, ई कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक कीटाणुओं से खाद्य विषाक्तता का कारण बन सकती हैं।
ताजे फल और सब्जियां खेत से घर तक आने तक की यात्रा के दौरान कहीं भी दूषित हो सकती हैं। इन्हें पकाने से पहले अच्छी तरह धोएं और अधपका तो कत्तई न छोड़ें।भारत में चावल सबसे आम अनाज है जिसका सेवन अधिकांश घरों में किया जाता है। बिना पके चावल बकिल्लुस सेरेउस बैक्टीरिया से दूषित हो सकते है, इस बैक्टीरिया का खतरा तो पके हुए चावल में भी बना रहता है। गर्मी में कच्चा आटा या कच्ची रोटियों से भी बचना चाहिए।
● फूड पॉइजनिंग में सबसे महत्वपूर्ण बात है स्वच्छता!
अगर खाना बनाने वाला व्यक्ति ध्यान न दे और हाथ न धोए तो फूड पॉइजनिंग हो सकती है। फूड पॉइजनिंग में सबसे बड़ी गलती मरीज द्वारा मेडिकल स्टोर से जाकर एंटी-डायरियल, एंटी-वोमिटिंग दवा खरीदना है। यह तरीक़ा उचित नहीं है क्योंकि हम शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना चाहते हैं। बेशक, जब बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकलते हैं तो हम इलेक्ट्रोलाइट्स खो देते हैं। इसलिए, फूड पॉइजनिंग और गर्मियों में होने वाले डायरिया में सबसे पहले आराम करना चाहिए,दोपहर की चिलचिलाती धूप से बचना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए,नीबू पानी हो तो और भी बेहतर ताकि खोए हुए पानी,लवण,खनिज और इलेक्ट्रोलाइट को फिर से शरीर में जमा किया जा सके! यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि गंभीर डायरिया और उल्टी की स्थिती में इनको रोकने वाली दवा न लें,सबसे अच्छा तो यही होगा कि तुरंत अस्पताल जाएँ।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रोगी कुछ भी नहीं खा सकता है और अगर वह जो कुछ भी खाता है उसे बाहर निकालता है, तो उसे अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। क्योंकि रोगी को तब तक नसों के ज़रिए खाना दिया जाना चाहिए,जब तक कि वह अपने मुँह से निगलने और पेट में रखने की प्रक्रिया शुरू न कर दे। क्योंकि भोजन विषाक्तता और दस्त जो बहुत ही साधारण लगते हैं,कई दफा मौत का कारण भी बन सकते हैं।


