ठगों का ‘ Axis बैंक कनेक्शन’ बेनकाब।

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■ राजस्थान से झारखंड, कर्नाटक से दुबई–सिंगापुर तक फैला साइबर मनी ट्रांसफर का महाजाल।

● CBI की सर्जिकल स्ट्राइक मे मामला आया सामने।

जय सिंह/ मुंबई वार्ता

मुंबई मे सायबर क्राइम के ठगों को संरक्षण देने वालों पर सी बी आई ने शिकजा कसा है। बता दे इसके बाद ठग बाज़ार और बैंक तंत्र की गाठें खुलने लगी हैं। डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में करोड़ों की दलाली वाले गिरोह को बैंक के भीतर से मिली “काली छतरी” का पर्दाफाश CBI ने कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक अंधेरी स्थित Axis Bank की शाखा में मैनेजर नितेश ने तीन फर्जी म्यूल अकाउंट खुलवाकर साइबर ठगों को सीधा वी आई पी रास्ता दे दिया। जब सी बी आई ने जांच की तो पता चला की बैंक मे के वाय सी की फाइलो मे अधूरी जानकारी, कागजों में छेद ही छेद है। इतना ही नहीं वेरिफिकेशन भी कुर्सी पर बैठे–बैठे, बिना किसी भौतिक जांच के कर दिया गया। और तो औरअकाउंट खुलते ही करोड़ों के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन दौड़ने लगे।

ठगे गए पैसों को इन खातों से “फ्लैश ट्रांसफर” कर दूसरे राज्यों और विदेशों में उड़ाया गया। CBI के मुताबिक म्यूल अकाउंटों के जरिए डिजिटल अरेस्ट गैंग को वित्तीय नाड़ी मिलती थी — और इस नाड़ी को अंधेरी शाखा के भीतर से ही संचालित किया जा रहा था। CBI ने Axis Bank मुख्यालय, वर्ली से गोपनीय दस्तावेज़ तलब किए हैं।अंधेरी शाखा के दो और कर्मचारियों से लगातार पूछताछ हो रही है।साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए “बैंक–लिंक चेन” को खंगालने का अभियान जारी है।

इस घटना से बैंक ग्राहक सकते में हैं । CBI सूत्रों के अनुसार मामला सिर्फ तीन फर्जी म्यूल खातों का नहीं है पूरी ब्रांच में ‘वेरिफिकेशन सिंडिकेट’ का शक गहराने लगा है।CBI की जांच में तीन बड़े पॉइंट सामने आए है। केवाईसी की डोर खींचने वाला ‘अनदेखा हाथ’ जिन ग्राहकों के नाम पर म्यूल खाते खुले, वे मुंबई में कभी दिखे ही नहीं, आधार–पैन की फोटो कॉपी संदिग्ध और कई दस्तावेज़ एक ही मोबाइल नंबर से भेजे गए हैं।

■ वेरिफिकेशन रिपोर्ट में जालसाजी

CBI को ब्रांच के रिकॉर्ड में फिजिकल वेरिफिकेशन की झूठी एंट्री मिली।मतलब बिना किसी ग्राहक से मिले “verified at residence” लिखा गया था। कर्मचारियों ने CBI के सवालों पर“यह सब नितेश के निर्देश पर हुआ” कहकर गेंद ऊपर फेंक दी। लेकिन CBI को शक है कि नितेश अकेला नहीं— पूरी एक मिनी-टीम इसमें शामिल थी। इन तीन म्यूल अकाउंट्स में राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक और दुबई–सिंगापुर रूट के ट्रांसफर सामने आए। जब खाता खुला उसके 24 घंटे के भीतर 70–90 लाख की एंट्री , 48 घंटे में रकम उड़ाई गई , 72 घंटे में खाता निष्क्रिय हुआ।

यह पैटर्न साइबर गैंग के प्रोफेशनल सिस्टम जैसा है।सी बी आई ने वर्ली हेडक्वार्टर में फ़ाइल मगाई है। अंधेरी ब्रांच का KYC वेरिफिकेशन लॉग, CCTV फुटेज – अकाउंट ओपनिंग दिनों की ब्रांच–स्तर के approval रिकॉर्ड, नितेश के लॉगिन एक्सेस डेटा , इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट , सस्पिशियस ट्रांजैक्शन अलर्ट (STR), रिटेल बैंकिंग चेकर–मेकर एप्रूवल फाइल मंगाया गया है। HQ ने CBI को कहा है— “हम पूर्ण सहयोग कर रहे हैं”,लेकिन अंदर की हवा कुछ और कह रही है। मामले की जांच जारी है।

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