सौरभ शांडिल्य / मुंबई वार्ता

पौष माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी ,शुक्रवार 3 जनवरी 2025 को तीन शुभ योगों में मनाई जाएगी। नए साल की पहली चतुर्थी पर भद्रा के साथ पंचक का भी साया पड़ने वाला है। पौष विनायक चतुर्थी के दिन भद्रा का वास धरती पर है। साथ ही शुक्रवार से ही पंचक की शुरुआत हो रही है। भद्रा काल में किसी भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है लेकिन गणेश पूजा की जा सकती है।


ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र के अनुसार पौष माह की विनायक चतुर्थी पर रवि योग, वज्र योग और सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही धनिष्ठा नक्षत्र और शतभिषा नक्षत्र का सुखद संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 3 जनवरी शुक्रवार को सुबह 01:08 बजे शुरू होगी। इसका समापन 3 जनवरी को ही रात 11:39 बजे होगा।
उदया तिथि की मान्यता के अनुसार पौष विनायक चतुर्थी का व्रत 3 जनवरी शुक्रवार को ही रखा जाएगा। पौष विनायक चतुर्थी के दिन रवि योग, वज्र योग और सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। रवि योग सुबह 7:14 बजे से प्रारंभ होगा और रात 10:22 बजे तक रहेगा। व्रत के दिन वज्र योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:38 बजे तक है। उसके बाद सिद्धि योग शुरू होगा जो रात तक है। विनायक चतुर्थी को धनिष्ठा नक्षत्र प्रात: से रात 10:22 बजे तक है, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू होगा।
विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त नए साल की पहली विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11:23 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:25 बजे से 06:20 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक है। विनायक चतुर्थी पर भद्रा दोपहर में 12:25 बजे से लगेगी और रात 11:39 बजे तक है। इसी दिन पंचक की शुरुआत सुबह 10:47 बजे से होगी और 4 जनवरी को सुबह 7:15 बजे तक रहेगी।


