हिंदू जनजागृति समिति का प्रयास सफल,
आस्था की हुई जीत
वरिष्ठ संवाददाता / मुंबई वार्ता

धाराशिव जिला अधिकारी द्वारा श्री तुळजा भवानी मंदिर संस्थान की तिजोरी में रखे सोने-चांदी के गहनों को पिघलाने की मांग को मुंबई उच्च न्यायालय की संभाजीनगर पीठ ने खारिज कर दिया है। न्यायाधीश मंगेश पाटील और शैलेश ब्रह्मे की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
हिंदू जनजागृति समिति ने सरकारी निर्णय का कड़ा विरोध किया था और हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। समिति ने भक्तों की श्रद्धा की रक्षा और देवस्थान में हुए घोटालों को उजागर करने के लिए न्यायालय में याचिका दायर की थी. उस पर सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया गया।
समिति की ओर से मुंबई उच्च न्यायालय में पक्ष रखने वाले एड. उमेश भडगावंकर ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंदिर के गहनों को प्रशासन द्वारा पिघलाने (गलाने) की मांग को ख़ारिज कर दिया। हिंदू विधिज्ञ परिषद के संस्थापक सदस्य और मुंबई उच्च न्यायालय के एड. सुरेश कुलकर्णी ने बताया कि तुलजापुर देवस्थान में वर्ष 1991 से 2009 के बीच तत्कालीन न्यासी, सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों ने मिलकर 8 करोड़ 50 लाख का घोटाला किया। घोटाले की शिकायत के बावजूद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसको लेकर हिंदू जनजागृति समिति ने मुंबई उच्च न्यायालय के संभाजीनगर खंडपीठ में एक याचिका दायर कर 8 ठेकेदारों, 8 सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों, जिलाधिकारी और तहसीलदार के विरुद्ध मामला दर्ज करने की मांग की थी।
अदालत ने 9 मई 2024 को इन सभी के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज करने का आदेश भी दिया है।गहनों को पिघलाने की कवायद कुलकर्णी के अनुसार इसके बाद धाराशिव जिला अधिकारी ने 2009 से 2024 के बीच अर्पित किए गए सोने-चांदी के गहनों को पिघलाने की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। हिंदू जनजागृति समिति ने इसका भी कड़ा विरोध किया। समिति ने तर्क दिया कि 1991-2009 के बीच के घोटाले और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए यह अनुमति मांगी जा रही है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में घोटाले का मामला अभी भी लंबित है, इसलिए यह अनुमति न दी जाए।


