मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में दहिसर नदी पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण परियोजना (फेज-1) का लोकार्पण रविवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हाथों किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केवल बृहन्मुंबई महानगरपालिका के प्रयासों से नदियों की सफाई संभव नहीं है, बल्कि नागरिकों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जब लोग नदी में कचरा डालना बंद करेंगे, तभी दहिसर नदी सफाई अभियान एक जनआंदोलन के रूप में सफल होगा।


पीयूष गोयल ने कहा कि देशभर में 350 नदियों के पुनर्जीवन का अभियान चल रहा है और दहिसर नदी का एसटीपी मॉडल पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन सकता है। उन्होंने नदी के गहरीकरण, गाद हटाने और प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि आगामी चरणों में दहिसर नदी क्षेत्र को पर्यटन और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करने की बड़ी संभावना है।


उन्होंने बताया कि इस परियोजना से बारिश के दौरान बाढ़ की समस्या में भी राहत मिलेगी। साथ ही जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे प्रतिदिन निगरानी करें कि नदी से कचरा नियमित रूप से हटाया जा रहा है या नहीं।
उपमहापौर संजय घाड़ी ने कहा कि मातृदिवस के अवसर पर इस परियोजना का उद्घाटन होना विशेष खुशी की बात है। उन्होंने नागरिकों से नदी में कचरा न फेंकने की अपील की और लगातार गंदगी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय विधायक मनीषा चौधरी ने बताया कि दहिसर एसटीपी परियोजना से गैराज, वाहन धुलाई, भवन निर्माण और सड़क सफाई जैसी गतिविधियों के लिए पुनर्चक्रित पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावित 1,244 परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।
■ परियोजना की मुख्य विशेषताएं
बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा दहिसर नदी पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण परियोजना (फेज-1) के तहत अत्याधुनिक मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर तकनीक पर आधारित दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए गए हैं।
1.5 एमएलडी क्षमता का एसटीपी सुकुरवाड़ी, बोरीवली पूर्व में स्थापित किया गया है।
5 एमएलडी क्षमता का दूसरा एसटीपी इंदिरानगर, दहिसर पश्चिम में बनाया गया है।
दोनों संयंत्र पूरी तरह स्वचालित हैं और अगले 15 वर्षों तक इनके संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था की गई है। यहां उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, सड़क सफाई, औद्योगिक उपयोग और अन्य गैर-पेय कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
परियोजना के तहत 4.75 किलोमीटर नदीपात्र सुधार कार्य तथा 4.4 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही इंटरसेप्टर लाइन और सर्विस रोड भी विकसित किए जाएंगे, जिससे नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोका जा सकेगा।
महानगरपालिका के अनुसार, इस परियोजना से दहिसर नदी में जाने वाले सांडपानी में बड़ी कमी आएगी और पर्यावरण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।


