सुरेश मिश्र/कवि/मुंबई वार्ता

सुना गजोधर अब का होइहैं, फैशन अइसन करइ धमाल।
संत कमासुत बनिगै सगरे,नेता बनिगै नटवरलाल।
बने नचनिया सबका मॉडल,पगलाइल सब होत निहाल।
भूलि गएन गउवां वाले भी,फगुआ,कजरी अरु चउताल।


सासु भरत बा पानी घर मा,करइ पतोहिया बइठि बवाल।
बोझ लगत हैं माई-बाबू,जिनगी भइ जी का जंजाल।
सती कहावइं आजु पतुरिया,जग के बदलि गइल बा चाल।
महुआ पीके महुआ बोलइं,देखा उबलत बा बंगाल।
कंठी वाले ठर्रा मारइं,पूजा करइं दलित अउ पाल।
जे छिनरा ते डोली सॅंग मा,अगुआ बनि गै आजु दलाल।
हिंदी रोवइ फूटि-फूटि के,कान्वेंट लूटत बा माल।
संस्कृत वेंटिलेटर पर बा,अंगरेजी बनि गइ महिपाल।
रेप होत बाटइ थाने मा,लाज बचावइं अब गोपाल।
प्रवचन मा भी खूब बजत बा,हरमुनिया,बिन्जो,करताल।
गजब मीडिया सोशल वाली,फेंकइ फेसबुकवा पे जाल।
लड़की बनिगै लरिका सगरे,लाइक पाकर होंइ निहाल।
वृद्धाश्रम में माई रोवइं,बेटवा बीबी सॅंग खुशहाल।
जे मेहनतकश गोबर काढ़इ,बेइमनवां भै मालामाल।
खेतिया नील गाइ सब चरि गै,भएन किसान सबइ कंगाल।
महंगाई मुड़वा चढ़ि नाचइ,द्रोही बा जे करइ सवाल।
भाईचारा तेल लगावइ,मानवता के उघरल खाल।
गला कटत बा गलिन-गलिन मागंगा -जमुनी ठोकइ ताल।
कहो तेवारी अब का होइहैं,बभनेन पर बा भूत सवार।
एक तेवारी रहेन बेचारू,हत्या होइ गइ आजु बिहार।
गारी खूब दिहेन बभनेन के टीपू के सॅंग राम गोपाल।
आजम भइया सड़इं जेल मा,मुस्की मारि रहे शिवपाल।
डिंपल भउजी अइसन रोवइं,भरिगा नदी,नहर अरु ताल।
कहइं मुलायम अब का होई,भइल बुढ़ौती मोर हलाल।
जे मेहरारू के आरक्षण,बिल पर मिलिके किहिन विरोध।
ओनकर दल दलदल मा जाई,मनई मिलिके करिहैं शोध।
सीना तानि चलइ बुलडोजर,गुंडा-लुक्खा चलेन पराइ।
कहो मखोधर अब का होई?कुकर -बिलारि रहे चिंचियाइ।
फूहर-पातर लिखि-लिखि गावइं,फिलिम न देखि सकइ परिवार,
आधा कपड़ा पहिन के छोरिया,घूमत बाइन आजु बजार।
धुक-धुक-धुक-धुक जियरा बोलइ,मगन वाटसप में सब भाय।
पढ़ी लिखी मेहरारू खेलइं,बहिगा दूध, उबलि गइ चाय।
कजरी,फगुआ,आल्हा,सोहर,भूलत बाटइ आपन देस।
आल्हा पढ़ि ल्या सब केउ भइया,लिखि-लिखि भेजइं रोज सुरेश।


