महिलाओं को 1 रुपये सालाना पट्टे पर मिलेगी सरकारी बंजर जमीन, स्वयं सहायता समूहों से लाभ उठाने की अपील।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने राजमाता जिजाऊ महिला सशक्तिकरण योजना के तहत सरकारी बंजर भूमि को मात्र एक रुपये वार्षिक नाममात्र पट्टे पर उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक चित्रा वाघ ने महिला स्वयं सहायता समूहों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार का इस निर्णय के लिए अभिनंदन किया।


शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में चित्रा वाघ ने कहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर उसे व्यवहार में उतारने का काम राज्य सरकार ने किया है। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन भी उपस्थित थे।


उन्होंने बताया कि 19 जून से लागू नई नीति के तहत सरकार और कृषि महामंडल की बंजर भूमि, परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित होकर अनुपयोगी पड़ी जमीन, ग्राम पंचायत की अनुमति से उपलब्ध गायरान भूमि तथा विभिन्न सरकारी विभागों की बंजर जमीन पट्टे पर दी जाएगी।


इस योजना का लाभ महिला सेवा सहकारी संस्थाएं, ‘उमेद’ और ‘माविम’ के तहत पंजीकृत महिला स्वयं सहायता समूह, आत्महत्या प्रभावित किसानों की विधवा महिलाओं के समूह, ग्राम संघ तथा महिला बेरोजगार सहकारी संस्थाएं उठा सकेंगी।


यह भूमि चारा उत्पादन, बांस की खेती, नर्सरी में पौध तैयार करने तथा अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के लिए आवश्यक कच्चे माल के उत्पादन के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। भूमि को सब-लीज पर नहीं दिया जा सकेगा और उस पर स्थायी निर्माण की अनुमति भी नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन होने पर पट्टा रद्द कर दिया जाएगा।


चित्रा वाघ ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं सहायता समूह का कम से कम तीन वर्ष पुराना पंजीकरण होना आवश्यक है। समूह का बैंक खाता कम से कम एक वर्ष से सक्रिय होना चाहिए तथा उसका वार्षिक कारोबार 50 हजार रुपये तक होना चाहिए। पशुपालन और कृषि का अनुभव रखने वाले समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी।


चारा उत्पादन के लिए तीन वर्ष और बांस की खेती के लिए दस वर्ष की पट्टा अवधि निर्धारित की गई है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूहों के लिए पट्टे के नवीनीकरण की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही सभी लाभार्थियों को कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।


योजना के तहत 10 महिला सदस्यों वाले स्वयं सहायता समूह को एक हेक्टेयर, 20 सदस्यीय महिला सेवा सहकारी संस्था को दो हेक्टेयर तथा ग्राम संघ को पांच हेक्टेयर भूमि पर उत्पादन की अनुमति दी जाएगी।


सरकार के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जून के अंत तक आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जुलाई के अंत तक पात्र आवेदनों का चयन किया जाएगा और अगस्त के अंत तक भूमि का हस्तांतरण किया जाएगा। अक्टूबर के अंत तक भूमि तैयार करने और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि दिसंबर के पहले सप्ताह से चारा और बांस की खेती शुरू की जाएगी।


सरकार ने यह भी तय किया है कि उत्पादित चारे की आपूर्ति में गांव के किसानों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी और उसके बाद ही इसे बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।

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