मुंबई वार्ता संवाददाता

28 सितंबर 2023 को पारित 106वें संविधान संशोधन के जरिए महिला आरक्षण कानून को मंजूरी मिलना एक ऐतिहासिक कदम माना गया। लेकिन इस मुद्दे पर अब राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रवक्ता और मुंबई युवक अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने बीजेपी पर इस कानून को लेकर “राजनीतिक दिखावा” करने का आरोप लगाया है।


मातेले का कहना है कि संसद में इस बिल को भारी समर्थन मिला था—454 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल 2 सांसद विरोध में थे। ऐसे में वे सवाल उठाते हैं कि जब विपक्षी गठबंधन ने भी पूरा समर्थन दिया, तो बीजेपी अकेले इसका श्रेय क्यों ले रही है।
उन्होंने सबसे बड़ा मुद्दा कानून के तत्काल लागू न होने को बताया। उनके अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने के लिए पहले जनगणना और फिर परिसीमन (Delimitation) जरूरी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी, बल्कि भविष्य के लिए टाल दी गई है।
मातेले ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है और इसी के जरिए राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, यह कदम महिला सशक्तिकरण से ज्यादा सत्ता बनाए रखने की रणनीति हो सकता है।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सांसदों के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें तत्काल 50% महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी, और कहा कि इस पर बीजेपी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया।
मातेले ने निष्कर्ष में कहा कि महिला आरक्षण कानून का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसे लागू करने में देरी, परिसीमन की शर्तें और राजनीतिक श्रेय लेने की होड़, बीजेपी के “दोहरे रवैये” को उजागर करती हैं।
उन्होंने इसे “नारी शक्ति वंदन” नहीं, बल्कि “नारी शक्ति का राजनीतिक उपयोग” करार दिया।


