मुंबई वार्ता संवाददाता

20 दिसंबर 2025“नवभारत की यात्रा केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्देश्य, नवोन्मेष और ईमानदार मूल्यों पर आधारित सभ्यतागत आत्मविश्वास की यात्रा है।” यह विचार केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बोरीवली ईस्ट स्थित कोरा केंद्र ग्राउंड नंबर 4 में आयोजित ऋषभायन कार्यक्रम में व्यक्त किए।


■ ‘नए भारत के लिए औद्योगिक नेतृत्व:
उद्देश्य, नवोन्मेष और ईमानदारी’ विषय पर अपने संबोधन में गोयल ने कहा कि भारत का विकास मॉडल उसकी सांस्कृतिक विरासत और सनातन मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ‘जय जिनेंद्र’ के उद्घोष और भगवान ऋषभदेव को नमन के साथ की।गोयल ने कहा कि ऋषभदेव की शिक्षाओं ने कृषि, वाणिज्य, कौशल, शिल्प, रक्षा और ज्ञान के माध्यम से समाज को दिशा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अमृत संकल्प’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास और विरासत दोनों मिलकर ही नवभारत की पहचान बनाते हैं।


उन्होंने जैन धर्म को आज की वैश्विक चुनौतियों के समाधान का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि सेवा, सद्भावना और करुणा जैन समाज की पहचान है। “देश की केवल 0.5 प्रतिशत जनसंख्या होने के बावजूद जैन समाज का कर संग्रह में 24 प्रतिशत योगदान है, जो उनके कर्तव्यबोध और ईमानदारी का प्रतीक है,” गोयल ने कहा।
स्टार्टअप क्षेत्र पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में दो लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं, जिनसे 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का ‘फंड ऑफ फंड्स’ अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने जैन सिद्धांत ‘परस्परोपग्रहो जीवाणाम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भावना आज की स्टार्टअप संस्कृति में दिखाई देती है।
अपने संबोधन के अंत में गोयल ने कहा, “हमें ऐसा भारत बनाना है जो तकनीकी रूप से सक्षम हो, आर्थिक रूप से समृद्ध हो, लेकिन साथ ही मानवता, करुणा और मूल्यों से परिपूर्ण रहे — और अपनी विरासत को कभी न भूले।”


