मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तो लगातार हो रही है, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन चालक ई-चालान का जुर्माना भरने से बच रहे हैं। वर्ष 2019 से अब तक राज्य में ट्रैफिक उल्लंघनों के ई-चालान के रूप में करीब 5,724 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। यह आंकड़ा यातायात नियमों के पालन और जुर्माने की वसूली, दोनों के सामने बड़ी चुनौती को दर्शाता है।


ई-चालान व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य यातायात नियम तोड़ने वालों पर डिजिटल तरीके से कार्रवाई करना और जुर्माने की वसूली को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना था। महाराष्ट्र हाईवे ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ई-चालान प्रणाली तकनीक के माध्यम से यातायात उल्लंघनों की पहचान कर कागजरहित तरीके से दंड लगाने में मदद करती है।
हालांकि, चालान जारी होने के बाद बड़ी संख्या में लोग निर्धारित जुर्माना जमा नहीं कर रहे हैं। नतीजतन, वर्षों से लंबित चालानों की रकम लगातार बढ़ती जा रही है। 5,724 करोड़ रुपये का बकाया राज्य सरकार के लिए केवल राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि यातायात नियमों के प्रति लोगों की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करता है।
ई-चालान के जरिए नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई में ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन, तेज गति से वाहन चलाना, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट वाहन चलाना और अन्य मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन शामिल हैं। मुंबई समेत राज्य के विभिन्न शहरों में कैमरों और डिजिटल प्रणालियों के जरिए ऐसे उल्लंघनों पर नजर रखी जा रही है।
पिछले वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि चालान जारी करने की संख्या और वसूली के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। ऐसे में बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन को अब अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। ई-चालान का उद्देश्य तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ उसकी समय पर वसूली भी सुनिश्चित हो।
5,724 करोड़ रुपये की बकाया राशि यह बताती है कि महाराष्ट्र में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की संख्या से कहीं बड़ी चुनौती अब लंबित ई-चालानों की वसूली बन गई है।


