परीक्षा के बीच ‘एनरोलमेंट वेरिफिकेशन’ अभियान पर विवाद, शिक्षकों ने जताई नाराज़गी।

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मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय


राज्य शिक्षा विभाग द्वारा 11 अप्रैल से 22 अप्रैल तक राज्यभर में ‘एनरोलमेंट वेरिफिकेशन’ (नामांकन सत्यापन) अभियान चलाने की घोषणा के बाद शिक्षकों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। यह अभियान तीन चरणों—11 अप्रैल, 15 अप्रैल और 22 अप्रैल—को आयोजित किया जाएगा, जिसमें कक्षा 2 से 9 और कक्षा 11 के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। पहली बार कक्षा 1 के छात्रों को भी इस प्रक्रिया में जोड़ा गया है।


हालांकि, शिक्षकों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि यह सत्यापन प्रक्रिया पीरियॉडिक असेसमेंट टेस्ट (PAT) के दौरान ही आयोजित की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा के समय इस तरह का अतिरिक्त कार्यभार संभालना बेहद मुश्किल होगा।


शिक्षक संगठनों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब सरकार के पास पहले से ही आधार-आधारित डेटा, APAAR आईडी और UDISE+ जैसी डिजिटल प्रणालियों में छात्रों की जानकारी उपलब्ध है, तो फिर भौतिक सत्यापन की आवश्यकता क्यों है। उनका मानना है कि यह फैसला शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव डालने वाला है और मौजूदा डिजिटल सिस्टम पर अविश्वास दर्शाता है।
पुणे से शिक्षक विधान परिषद सदस्य जयंत आसगांवकर ने इस अभियान को स्थगित करने की मांग की है। वहीं, राज्य प्राचार्य संघ के पूर्व प्रवक्ता महेंद्र गणपुले ने भी इसके समय और शिक्षकों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर चिंता जताई है।


विभाग ने आलोचनाओं के बावजूद इस अभियान को जारी रखने का निर्णय लिया है और जिला परिषद कर्मचारियों से सहयोग मांगा है। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में जाकर उपस्थिति और रिकॉर्ड का सत्यापन करने की मुख्य जिम्मेदारी फिर भी उन्हीं पर रहेगी।
कक्षा 1 के छात्रों को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई स्कूलों में उनकी परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और गर्मी की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश के दौरान भी काम पर बुलाए जाने की आशंका है।


इसके अलावा, कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षाएं पहले से ही चल रही हैं और कई स्कूलों में मराठी, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों की परीक्षा के दिन ही सत्यापन तय किया गया है। इससे शिक्षकों को एक साथ परीक्षा ड्यूटी और सत्यापन कार्य संभालना पड़ेगा।


जैसे-जैसे तिथियां नजदीक आ रही हैं, शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई शिक्षक सरकार से अपील कर रहे हैं कि इस अभियान की समय-सारणी पर पुनर्विचार किया जाए और परीक्षा के दौरान कार्यभार कम किया जाए।
वहीं, सरकार का कहना है कि यह अभियान छात्रों के नामांकन और शैक्षणिक रिकॉर्ड को सटीक बनाए रखने के लिए आवश्यक है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशकों द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।

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