मुंबई वार्ता संवाददाता

आईआईटी-बॉम्बे के 22 वर्षीय छात्र की मौत के मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को जांच के दौरान पता चला है कि परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने के बाद छात्र ने अपने कुछ दोस्तों से बातचीत की थी और घटना को लेकर पछतावा जताया था। पुलिस ने अब तक आईआईटी-बॉम्बे के छात्रों और हॉस्टल कर्मचारियों समेत 25 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं।


पुलिस के मुताबिक, छात्र को 18 सितंबर को दोपहर करीब 12:40 बजे परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़ा गया था। इसके बाद वह हॉस्टल में गया और शाम को अपने कमरे में मृत पाया गया। इस दौरान उसने कुछ दोस्तों से फोन पर बातचीत की थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, छात्र ने दोपहर करीब 2:30 बजे एक महिला मित्र से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान उसने कहा था कि उससे गलती हो गई और उसका थर्मोडायनामिक्स का पेपर भी अच्छा नहीं गया था। पुलिस के मुताबिक, उसने परीक्षा में नकल पकड़े जाने की घटना को लेकर भी पछतावा व्यक्त किया था।
अपराध शाखा ने छात्र के आईफोन को कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजा है। पुलिस फोन का डेटा हासिल करने का प्रयास कर रही है। यदि फॉरेंसिक जांच के जरिए फोन नहीं खुलता है, तो पुलिस एप्पल से तकनीकी सहायता लेने पर भी विचार कर रही है। इसके अलावा व्हाट्सऐप से छात्र के अकाउंट से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य से परीक्षा के दौरान हुई घटना तथा छात्र के परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की जांच में मदद मिल सकती है। पुलिस ने आईआईटी-बॉम्बे परिसर के सीसीटीवी फुटेज को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है, ताकि उसे मामले में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
छात्र के परिवार ने आईआईटी-बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर जातिगत आधार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। परिवार की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक प्रोफेसर डूला का बयान दर्ज नहीं किया है।
पुलिस छात्र की मौत से पहले परीक्षा के दौरान हुई घटना और उसके बाद के घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में छात्र के दोस्तों, सहपाठियों, हॉस्टल कर्मचारियों और संस्थान से जुड़े अन्य लोगों के बयान लिए जा रहे हैं।


