मुंबई वार्ता संवाददाता

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे कल घोषित होने वाले हैं, और इससे पहले सट्टा बाजार पूरी तरह सक्रिय हो गया है। चुनाव परिणामों को लेकर अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों की जीत-हार पर करोड़ों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं।


सूत्रों के मुताबिक, सट्टा बाजार में प्रमुख मुकाबला सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच माना जा रहा है। कई जगहों पर मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है, जिसके चलते भाव (रेट) लगातार बदल रहे हैं। जिन राज्यों में त्रिकोणीय मुकाबला है, वहां सट्टा बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, कुछ राज्यों में सत्ताधारी दल को बढ़त दी जा रही है, जबकि कुछ में विपक्ष के पक्ष में रुझान बताया जा रहा है। हालांकि, सट्टा बाजार के ये आंकड़े पूरी तरह अनौपचारिक होते हैं और इनका वास्तविक चुनाव परिणामों से सीधा संबंध नहीं माना जाता।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सट्टा बाजार अक्सर स्थानीय माहौल और धारणा के आधार पर रेट तय करता है, लेकिन कई बार ये अनुमान गलत भी साबित होते हैं। इसके बावजूद चुनाव के दौरान सट्टा बाजार की हलचल को राजनीतिक माहौल का एक संकेतक माना जाता है।
प्रशासन की ओर से भी ऐसे अवैध सट्टेबाजी पर नजर रखी जा रही है और कई जगहों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
कल आने वाले नतीजों के साथ यह साफ हो जाएगा कि सट्टा बाजार के अनुमान कितने सही साबित होते हैं।


