श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

धारावी पुनर्विकास परियोजना में एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अब झोपड़पट्टी के ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले रहिवासियों को भी पुनर्वसन का लाभ दिया जाएगा। धारावी पुनर्विकास प्राधिकरण के अनुसार, यह देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें ऊपरी मंजिल के निवासियों को भी शामिल किया जा रहा है।


4 अक्टूबर 2024 को जारी शासन निर्णय के मुताबिक, 15 नवंबर 2022 से पहले धारावी में रह रहे ऊपरी मंजिल के सदनिकाधारकों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। इन्हें धारावी के बाहर, लेकिन मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 300 वर्ग फुट का घर दिया जाएगा। यह घर हायर-परचेस (किराया-खरीद) योजना के तहत मिलेगा, जिसमें 25 साल तक नाममात्र किराया देने के बाद 26वें वर्ष में मालिकाना हक मिल जाएगा। साथ ही, चाहें तो लाभार्थी इस अवधि के भीतर शेष राशि चुकाकर पहले भी घर के मालिक बन सकते हैं।
हालांकि, ऊपरी मंजिल के निवासियों की पात्रता पूरी तरह ग्राउंड फ्लोर (तल मंजिल) के सदनिकाधारक की पात्रता पर निर्भर करेगी। यदि ग्राउंड फ्लोर का निवासी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो ऊपरी मंजिल के निवासियों की पात्रता भी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में केवल हलफनामा (अफिडेविट) स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुनर्विकास का लाभ लेने के लिए ऊपरी मंजिल के निवासियों को कट-ऑफ तारीख से पहले के निवास के पुख्ता दस्तावेज देने होंगे। इसके लिए सरकार द्वारा तय प्राथमिकता क्रम के अनुसार दस्तावेज जरूरी होंगे, जैसे—
बिजली बिल (पुराना और हालिया)
रजिस्टर्ड किरायानामा
खरीद करार और सहमति पत्र
आधार, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी
अंतिम विकल्प के रूप में, हलफनामा और ग्राउंड फ्लोर निवासी का प्रमाणपत्र
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक परिवार को केवल एक ही घर मिलेगा और पति-पत्नी व बच्चों द्वारा अलग-अलग आवेदन नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, जो लोग पहले से मुंबई महानगर क्षेत्र की किसी अन्य आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
इस फैसले से धारावी के हजारों ऊपरी मंजिल के रहिवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि दस्तावेजों और पात्रता की शर्तें पूरी करना उनके लिए चुनौती बना रह सकता है।


