मुंबई वार्ता संवाददाता

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन कर हड़बड़ी में गजट नोटिफिकेशन जारी करके इसे लागू कर फिटनेस टेस्ट फीस में 10 गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है। अब 10 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों के मालिकों को हर दो साल में ये टेस्ट कराना पड़ेगा और फीस व्हीकल की उम्र के हिसाब से बढ़ेगी। पहले 15 साल पुरानी गाड़ियों पर ही ज्यादा फीस लगती थी लेकिन अब 10 साल से ही ये नियम लागू कर दिया गया है। इसका मकसद सड़कों पर असुरक्षित और प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियां कम करना है ताकि हादसे घटें और हवा साफ रहे।


पहले 15 साल पुरानी गाड़ियों की टेस्ट फीस लगभग एक समान थी, लेकिन अब वाहन की उम्र के हिसाब से कैटेगरी बनाई गई है। 10 से 15 साल, 15 से 20 साल और 20 साल से ज्यादा की कैटेगरी डिवाइड की गई है।खासकर 20 साल से ऊपर की गाड़ियों की फीस 10 गुना तक बढ़ा दी गई है। ये बदलाव वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी को मजबूत करने के लिए भी किया गया हैं, जहां पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करके नई खरीदने पर छूट मिलती है।मान लीजिए, अगर किसी के पास एक पुरानी कार है जो 20 साल से ज्यादा पुरानी हो गई है, तो अब उसका फिटनेस टेस्ट कराने में 25,000 रुपये लगेंगे. पहले ये सिर्फ 2,500 रुपये था। इसी तरह मीडियम कमर्शियल व्हीकल्स जैसे छोटे ट्रक या वैन के लिए 20,000 रुपये लगेंगे जोकि पहले 1,800 रुपये थी।


इसके अलावा लाइट मोटर व्हीकल्स यानी कार या जीप के लिए 15,000 रुपये लगेंगे, थ्री-व्हीलर जैसे ऑटो-रिक्शा के लिए 7,000 रुपये और टू-व्हीलर्स यानी बाइक के लिए 2,000 रुपये देने पड़ेंगे. टू-व्हिलर्स के लिए पहले 600 रुपये लगते थे।15 से 20 साल पुरानी गाड़ियों के लिए भी फीस बढ़ी है। लेकिन 20 साल वाली के मुकाबले ये फीस थोड़ी कम है। सरकार का कहना है कि ये बढ़ोतरी इसलिए की गई है क्योंकि पुरानी गाड़ियां ज्यादा पॉल्यूशन फैलाती हैं और सड़क हादसों का खतरा बढ़ाती हैं। हर साल हजारों लोग पुरानी गाड़ियों की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। 10 साल से कम उम्र की गाड़ियों के लिए भी फीस में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है।
रूल 81 के तहत अब मोटरसाइकिल का टेस्ट 400 रुपये में, लाइट मोटर व्हीकल 600 रुपये में और मीडियम-हैवी कमर्शियल व्हीकल्स 1,000 रुपये में होगा। पहले ये फीस और कम थी।ये नियम पूरे देश में तुरंत लागू हो चुका है। पहले 15 साल की उम्र से फीस ज्यादा लगती थी, लेकिन अब 10 साल से शुरू हो गई है। सरकार का दावा है कि सड़कों पर नई और सुरक्षित गाड़ियां ज्यादा दिखेंगी। वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत अगर आप 15 साल पुरानी गाड़ी स्क्रैप करते हैं, तो नई खरीदते वक्त 4-6 प्रतिशत की छूट मिलती है। स्क्रैप सर्टिफिकेट दिखाकर इंश्योरेंस और रोड टैक्स में भी राहत आपको मिलती है। सरकार ने 2024 में ही 50 स्क्रैपिंग सेंटर्स खोलने का प्लान किया था, जो अब तेजी से काम कर रहे हैं।
शंकर ठक्कर ने नाराजगी जताते हुए कहा असली झटका तो पुराने वाहनों के मालिकों को जिन में खासकर छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और ग्रामीण इलाकों के लोग जो पुरानी गाड़ियां चलाते हैं, उनके लिए ये फीस का बोझ बढ़ जाएगा। भारत में करोड़ों पुरानी गाड़ियां हैं, खासकर बाइक और कारें। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग एक ही गाड़ी दशकों चलाते हैं, वहां फिटनेस टेस्ट सेंटर्स भी कम हैं। सरकार को कानून में बदलाव करने से पहले कानून के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक और बुनियादी तैयारी सरकार की ओर से की जानी चाहिए सिर्फ कानून में बदलाव लाने से कुछ नहीं होगा। इस निर्णय से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ढुलाई खर्च बढ़ेगा जिससे महंगाई बढ़ेगी और सामान्य लोगों और छोटे व्यापारियों, छोटे ट्रांसपोर्टरों को और भी तकलीफों का सामना करना पड़ेगा और एक साथ इतनी फीस बढ़ने से भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। सरकार द्वारा यह बदलाव बड़ी मोटर व्हीकल उत्पादक कंपनियों के दबाव में लिया गया लग रहा है इसलिए सरकार को इस कानून पर पुनर्विचार करना चाहिए।



मध्यम वर्ग के लिए ठीक नहीं है