श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई की विकास गाथा में अब पर्यावरण संरक्षण का नया फॉर्मूला सामने आया है—जहां परियोजना बनेगी वहां पेड़ कटेंगे, और जहां जगह मिलेगी वहां पौधे लगा दिए जाएंगे। यानी धारावी में हरियाली जाएगी और पालघर में उसकी “भरपाई” कर दी जाएगी।


मामला मुंबई की 3.3 किलोमीटर लंबी मिठी नदी के तट के विकास से जुड़ा है। इस परियोजना को अडानी समूह की कंपनी विकसित करेगी। योजना के तहत नदी किनारे आधुनिक वॉकवे, सार्वजनिक स्थान, लैंडस्केपिंग और अन्य सुविधाएं बनाई जाएंगी। लेकिन इसके लिए नदी किनारे मौजूद बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है।


अब सवाल उठ रहा है कि इन पेड़ों का क्या होगा? जवाब भी तैयार है—धारावी में कटेंगे, पालघर में लगाए जाएंगे।
मतलब अगर किसी इलाके की छांव खत्म हो रही है तो चिंता की कोई बात नहीं, क्योंकि कई किलोमीटर दूर किसी और जिले में पौधे लगा दिए जाएंगे। स्थानीय लोगों को शायद अब गर्मी से राहत पाने के लिए पालघर की यात्रा करनी पड़े!
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि दशकों पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाना बराबरी का सौदा नहीं हो सकता। एक परिपक्व पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि तापमान नियंत्रित करता है, पक्षियों का घर होता है और पूरे इलाके का पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखता है। दूसरी ओर, नया पौधा उसी भूमिका तक पहुंचने में वर्षों लगा देता है।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यदि विकास जरूरी है तो क्या ऐसी योजना नहीं बनाई जा सकती जिसमें अधिकतम पेड़ बचाए जाएं? आखिर “ग्रीन डेवलपमेंट” का मतलब सिर्फ कहीं भी पौधे लगा देना नहीं, बल्कि जहां हरियाली मौजूद है, उसे बचाना भी है।
फिलहाल विकास का नया गणित यही कहता दिख रहा है—मुंबई में पेड़ काटो, पालघर में पौधे लगाओ और रिपोर्ट में लिख दो—’पर्यावरण संतुलित है।’


