मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने बीडीडी (बॉम्बे डेवलपमेंट डायरेक्टरेट) चॉल के पुनर्विकास के बाद मिलने वाले मकानों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 1 जनवरी 2011 के बाद बीडीडी चॉल के सरकारी आवासों में रहने आए पात्र पुलिसकर्मियों को भी अब पुनर्विकसित इमारतों में 500 वर्गफुट का मकान मालिकाना हक के आधार पर दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित निर्माण लागत का भुगतान करना होगा।


राज्य के गृह विभाग ने 29 अक्टूबर को इस संबंध में शासनादेश (जीआर) जारी किया है। इसके अनुसार, वर्ली, नायगांव और एन.एम. जोशी मार्ग स्थित बीडीडी चॉल में रहने वाले पात्र पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके कानूनी वारिसों को 500 वर्गफुट क्षेत्रफल वाले पुनर्वास मकान आवंटित किए जाएंगे।
■ तीनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग निर्माण लागत तय
सरकार ने पुनर्विकसित मकानों की निर्माण लागत क्षेत्र के अनुसार निर्धारित की है। इसके तहत वर्ली में मकान के लिए 1.48 करोड़ रुपये, नायगांव में 72.25 लाख रुपये और एन.एम. जोशी मार्ग में 86.30 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
■ पहले 15 लाख रुपये में मकान देने का था फैसला
शासनादेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में 1 जनवरी 2011 तक बीडीडी चॉल में रहने वाले पुलिसकर्मियों को 15 लाख रुपये निर्माण लागत लेकर मालिकाना हक पर मकान देने की मंजूरी दी थी। लेकिन इसके बाद 1 जनवरी 2011 की निर्धारित तारीख के बाद इन चॉलों में रहने आए पुलिसकर्मियों ने भी मालिकाना हक पर मकान देने की मांग की थी।इसके बाद आवास विभाग ने पुनर्विकास के तहत वर्ली, नायगांव और एन.एम. जोशी मार्ग की तीनों बीडीडी चॉल परियोजनाओं से पुलिस विभाग को कुल 538 पुनर्वास मकान उपलब्ध होने की जानकारी दी।इनमें से मुंबई पुलिस आयुक्त ने 223 पुलिसकर्मियों को पात्र प्रमाणित किया है। इनमें वर्ली के 123, नायगांव के 84 और एन.एम. जोशी मार्ग के 16 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
सरकार के नए निर्णय के अनुसार, इन 223 पात्र पुलिसकर्मियों को निर्धारित निर्माण लागत वसूल करने के बाद 500 वर्गफुट के मकान मालिकाना हक के आधार पर आवंटित किए जाएंगे।
■ 315 मकान पुलिस विभाग के इस्तेमाल के लिए
कुल 538 उपलब्ध पुनर्वास मकानों में से शेष 315 मकान मुंबई पुलिस आयुक्त को सौंपे जाएंगे। इनका इस्तेमाल पुलिस विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार करेगा।इस फैसले से 1 जनवरी 2011 के बाद बीडीडी चॉल में रहने आए पात्र पुलिसकर्मियों को भी पुनर्विकसित इमारतों में मालिकाना हक पर घर पाने का अवसर मिलेगा।


