■ घटनाओं के बाद सक्रिय हुई पार्टी, वाराणसी पहुंचेंगे कॉंग्रेस प्रदेशाध्यक्ष।
श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

देश में जब-जब कोई बड़ा मुद्दा आता है, कांग्रेस की प्रतिक्रिया ठीक उसी तरह सामने आती है जैसे पुरानी ट्रेन—थोड़ी देर से, लेकिन शोर के साथ। अब काशी में मणिकर्णिका घाट का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस भी पूरी ऊर्जा में दिखाई दे रही है। प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल शुक्रवार को वाराणसी दौरे पर जा रहे हैं—क्योंकि बिना दौरे के कांग्रेस की राजनीति अधूरी मानी जाती है।


बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं का यह शिष्टमंडल मणिकर्णिका घाट का निरीक्षण करेगा और मौके पर खड़े होकर गंभीर मुद्रा में “संस्कृति खतरे में है” वाला बयान देगा। इसके बाद तस्वीरें आएंगी, प्रेस नोट जारी होगा और मामला अगले मुद्दे तक सुरक्षित रख दिया जाएगा।


दिलचस्प यह है कि कांग्रेस अब बुलडोज़र राजनीति के खिलाफ खड़ी है, जबकि जनता अभी तक यह समझने की कोशिश कर रही है कि पार्टी खुद किस राजनीति के पक्ष में खड़ी है। वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद अब कांग्रेस को आस्था, विरासत और इतिहास की याद अचानक आ गई है—वह भी तब, जब सत्ता से दूरी ने पार्टी को दर्शनशील बना दिया है।
प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि यह हमला हिंदू आस्था पर है। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की असली आस्था अब प्रेस कॉन्फ्रेंस, निरीक्षण दौरे और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह गई है। ज़मीन पर संगठन ढूंढने में पार्टी को उतनी रुचि नहीं, जितनी मौके पर पहुंचकर बयान देने में है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं का यह दौरा भी पहले जैसे अभियानों की तरह होगा—
निरीक्षण होगा, आरोप लगेंगे, सरकार को चेतावनी दी जाएगी और फिर पार्टी अगले मुद्दे की तलाश में निकल पड़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस को बुलडोज़र से ज़्यादा अपने संगठन की मरम्मत करने की ज़रूरत है। उत्तर प्रदेश से सांसद चुनी जाने वाली कॉंग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वाराणसी की ओर देखा तक नहीं, ना ही उत्तर प्रदेश कॉंग्रेस का कोई नेता वाराणसी पहुंचा। हालांकि महाराष्ट्र कॉंग्रेस अध्यक्ष को वाराणसी की चिंता सताने लगी और इसी चिंता से ग्रस्त वाराणसी दौरा करने से वे खुद को रोक नहीं पाए हैं।
जितनी देरी से उन्हें वाराणसी के मंदिरों की चिंता हुई है उससे तो उनकी मंशा को लेकर लोगों को चिंता होने लगी है। कॉंग्रेस को समय रहते किसी भी मुद्दे पर चिंतित होने की आवश्यकता है वर्ना जिस रफ्तार से पार्टी हर मुद्दे पर “देर से ही सही” पहुंचती है, कहीं ऐसा न हो कि जनता भी कह दे—अब रहने दीजिए, मामला पुराना हो गया है।


