मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में आर्थिक संकट से जूझ रहे बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) ने अल्टामाउंट रोड स्थित अपने प्रीमियम प्लॉट पर 35 फ्लैट्स को लीज़ पर देने का टेंडर रद्द कर दिया है। यह फैसला 25 मार्च को लिया गया, जिससे लगभग ₹263 करोड़ की संभावित आय वाली योजना पर रोक लग गई है।


इस टेंडर के तहत कंबाला हिल इलाके में स्थित 2,475.07 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बने A विंग के 15 और B विंग के 20 फ्लैट्स को लंबी अवधि के लिए निजी कंपनियों को लीज़ पर देने की योजना थी। यह कदम बेस्ट की उस रणनीति का हिस्सा था, जिसके तहत वह अपने बस डिपो और अन्य संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग कर गैर-भाड़ा राजस्व बढ़ाना चाहता है।हालांकि, इस प्रस्ताव का नागरिक समूहों और बेस्ट कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया।


उन्होंने सार्वजनिक जमीन के निजीकरण को लेकर चिंता जताई और अधिक पारदर्शिता की मांग की। अक्टूबर 2025 में कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार को एक श्वेत पत्र भी सौंपा था, जिसमें इस तरह के सौदों पर सवाल उठाए गए थे।टेंडर रद्द होने के बावजूद, इसी प्लॉट के C विंग के कुछ हिस्से पहले ही लीज़ पर दिए जा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आठ लग्जरी फ्लैट्स और एक रिसीविंग सबस्टेशन को 30 वर्षों के लिए सिक्का पोर्ट्स एंड टर्मिनल लिमिटेड को सौंपा गया है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।
इस प्लॉट पर मौजूद बिजली का रिसीविंग सबस्टेशन भी विवाद का कारण बना हुआ है, क्योंकि यह शहर की बिजली आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण ढांचा है और आमतौर पर आवश्यक सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा जाता है।यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बेस्ट पर अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने का दबाव है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने पहले ही बेस्ट को निर्देश दिया था कि वह अपनी कुल आय का कम से कम 40% हिस्सा गैर-भाड़ा स्रोतों से जुटाए।
करीब ₹10,000 करोड़ के संचयी घाटे से जूझ रहे बेस्ट के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अल्टामाउंट रोड टेंडर रद्द होने से यह स्पष्ट हो गया है कि सार्वजनिक संपत्तियों के व्यावसायीकरण और जनहित के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।


