मुंबई वार्ता संवाददाता

भारतीय जनता पार्टी सत्ता के लिए जाति-धर्म में झगड़े लगाकर अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रही है। केवल हिंदू-मुस्लिम धार्मिक विवाद खड़ा करने तक ही वे नहीं रुके, बल्कि मराठा-ओबीसी, आदिवासी और दलित समाज में भी फूट डालकर महाराष्ट्र के सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का पाप भाजपा ने किया है। छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती पर सामाजिक तनाव पैदा करने वाली भाजपा को जिला परिषद चुनाव में सबक सिखाएँ, ऐसा आह्वान महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आज छत्रपति संभाजीनगर जिले के लाडसावंगी, गणोरी, बाजार सावंगी और नागव में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए प्रचार सभाएँ कीं। इस अवसर पर जालना के सांसद डॉ. कल्याण काले, सेवादल के प्रदेशाध्यक्ष विलास औताडे, छत्रपति संभाजीनगर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, प्रदेश सचिव सुदामराव मते, शिवसेना के उपजिल्हाप्रमुख जगन्नाथराव पवार, फुलंब्री के नगराध्यक्ष राजेंद्र ठोंबरे तथा बड़ी संख्या में स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।


इस दौरान भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को खत्म करना चाहती है। वे एक देश और एक पार्टी का ढांचा बनाना चाहते हैं, इसलिए विपक्ष को समाप्त करने का काम कर रहे हैं। चुनाव में “पैसा फेंको तमाशा देखो” का खेल जोरों पर है, पुलिस की मदद से विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाया जाता है, और चुनाव आयोग भी सत्ताधारी पक्ष के लिए काम करता दिखाई दे रहा है। ऐसी परिस्थिति में भी कांग्रेस पार्टी जनता के सवालों, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लड़ रही है। नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में जनता ने कांग्रेस को अच्छा समर्थन दिया है। अब जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवारों को विजयी बनाइए, ऐसा आह्वान सपकाल ने किया।
भाजपा को किसान, महिलाएँ, मजदूर और युवाओं की समस्याएँ दिखाई नहीं देतीं। किसान आत्महत्या कर रहा है, कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, बेरोजगारी के कारण गाँव-गाँव के युवा चिंतित हैं। महँगाई बेतहाशा बढ़ गई है, लेकिन भाजपा सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय सामाजिक तनाव पैदा करने वाले मुद्दों को आगे लाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। भाजपा की इस चाल को पहचानिए, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


