भिवंडी में छह महीने में 142 नाबालिग बच्चे लापता, लड़कियों की संख्या ज्यादा।

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■ 90 फीसदी बच्चों को ढूंढने में पुलिस विभाग सफल,अन्य की तलाश में पुलिस सरगर्मी से जुटी

मुंबई वार्ता संवाददाता।भिवंडी

भिवंडी शहर इन दिनों नाबालिग बच्चों के अपहरण का गढ़ बन गया है।जहां पर पिछले छह माह में 142 नाबालिग बच्चे गायब हो चुके है।जिसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है। इनमें से 126 लड़के लड़कियों को ढूंढने में पुलिस ने सफलता हासिल की है।यानी 90 फीसदी लापता हुए बच्चों को खोजने में पुलिस सफल रही है।जबकि अन्य गायब बच्चों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।लेकिन शहरीय इलाके से बच्चों के गायब होने के सिलसिले को लेकर अभिभावकों में भय व चिंता व्याप्त है।

भिवंडी परिमंडल दो के पुलिस उपायुक्त क्षेत्र पिछले कुछ दिनों में घर से लापता होने वाले नाबालिग बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है।जिससे अभिभावकों में चिंता का स्तर भी बढ़ गया है। पुलिस उपायुक्त शशिकांत बोराटे ने बताया है कि जनवरी से जून माह के बीच छह महीनों के दौरान शहर से 142 नाबालिग बच्चे और लड़कियाँ लापता हुए। इनमें 47 लड़के और 95 लड़कियाँ शामिल हैं। इनमें से 44 लड़के और 82 लड़कियों को स्थानीय पुलिस ने ढूँढ लिया है। जबकि 16 लोगों की तलाश जारी है। जिनमें 3 लड़के और 13 लड़कियाँ हैं, का अभी तक पता नहीं चल पाया है।उन्होंने बताया कि कई लापता लड़कियों को पुलिस महकमे ने अन्य दूसरे राज्य से ढूँढ निकाला है।जबकि इन दिनों रोजाना नाबालिग बच्चों के गायब होने की घटना घट रही है।

पुलिस उपायुक्त शशिकांतबोराटे ने बताया कि लड़कियों के लापता होने के पीछे प्रेम प्रसंग, सोशल मीडिया की अधिकता और माता-पिता की उपेक्षा प्रमुख कारण हैं। शहर में लड़कियों के लापता होने के मामले बहुत कम होते हैं और लड़कियों के गायब होने के पीछे प्रेम प्रसंग मुख्य कारण होता है।

भिवंडी पुलिस उपायुक्त ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनके साथ प्यार से पेश आना और उन्हें समझना और अपने बच्चों के साथ संवाद करना महत्वपूर्ण है।कई मामलों में बच्चों से संवाद की कमी होती है और काउंसलिंग के दौरान अंदाजा लगाया जाता है कि ऐसी घटनाएं बच्चों द्वारा सोशल मीडिया मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हो रही हैं । यदि आप अपने बच्चों के व्यवहार में कोई बदलाव देखते हैं, तो उन्हें विश्वास में लेना और उनके साथ चर्चा करना महत्वपूर्ण है। माता-पिता को खुद पहल करनी चाहिए। उनका दोस्त बनना चाहिए और उनके जीवन पर गौर करना चाहिए ।

इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि कई बार स्कूल की परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद, परीक्षा में कम अंक आने से परिजन नाराज हो जाते हैं और कई बार बच्चे घर छोड़ देते हैं। आज के समय में बच्चों की अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं, अगर वे अपेक्षाएँ परिवार द्वारा पूरी नहीं की जाती हैं, तो बच्चे घर छोड़ देते हैं।जिसके कारण मार्च, अप्रैल, मई के महीनों में नाबालिग बच्चों के लापता होने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।उन्होंने बताया कि कई बार नाबालिग लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर फरार हो जाती है।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नाबालिग लापता बच्चों के गायब होने के मामले को अपहरण के रूप में दर्ज करने का प्रावधान है।इस कारण बच्चों के अपहरण की घटना ज्यादा दिखती है।

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