भिवंडी/ कृष्ण गोपाल सिंह/ मुंबई वार्ता

केंद्र और राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों में संशोधन करके चार श्रम संहिताएं लागू की हैं। इन श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द करने की मांग को लेकर मंगलवार को भिवंडी के लेट आनंद दिघे चौक पर प्रदर्शन किया गया।


CITU से संबद्ध लाल बावता पावरलूम वारपर और असंगठित ट्रेड यूनियन अध्यक्ष कॉमरेड सुनील चव्हाण के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया गया। केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों में संशोधन करके उन्हें चार श्रम संहिताओं में परिवर्तित कर दिया है।इस बदलाव से भारत के श्रमिकों द्वारा अथक संघर्ष के बाद हासिल किए गए श्रम कानूनों का संरक्षण समाप्त हो जाएगा और श्रमिकों की स्थिति दयनीय बंधुआ मजदूरों जैसी हो जाएगी।


भारत भर के केंद्रीय श्रमिक संघ केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा किए गए श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध कर रहे हैं। इसलिए, सुनील चव्हाण ने केंद्र सरकार से श्रम संहिता अधिनियम को निरस्त करने की मांग की है।


कॉमरेड सुनील चव्हाण के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में अनिल त्यागी, कमला ग़ाहु, मुमताज शेख, सूर्यभान यादव, प्रेमचंद सरोज, सदानंद भारती, प्रमोद यादव, सुरेश सचान सहित बड़ी संख्या में श्रमिक, घरेलू कामगार और बीड़ी मजदूर शामिल हुए।



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