मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता महेश तपासे ने पालघर के एक निजी अस्पताल में देर रात शिवसेना (शिंदे गुट) के पदाधिकारियों द्वारा कथित तौर पर हंगामा करने और डॉक्टरों व कर्मचारियों को धमकाने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे केवल अस्पताल पर हमला नहीं, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था और कानून के शासन के लिए भी गंभीर चुनौती बताया।


बताया गया है कि यह विवाद दहीहंडी उत्सव के दौरान घायल हुए एक गोविंदा पथक के सदस्य के इलाज को लेकर शुरू हुआ। तपासे का आरोप है कि सत्ता के प्रभाव में शिवसेना पदाधिकारी अस्पताल में दाखिल हुए, डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की, एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा और अस्पताल में तोड़फोड़ करने की धमकी दी।
पुलिस ने इस मामले में पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित, शहर प्रमुख राहुल घरात और नगरसेविका नीलम सांखे समेत 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
महेश तपासे ने कहा कि उपलब्ध जानकारी से लगता है कि यह कोई अचानक हुआ विवाद नहीं था, बल्कि सत्ता के अहंकार से पैदा हुई संगठित गुंडागर्दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने वाले दल के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने से इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।
■ डोंबिवली की घटना का भी किया जिक्र
तपासे ने डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों के साथ हुई कथित मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि उस मामले में भी शिवसेना (शिंदे गुट) के एक नगरसेवक पर डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट करने का आरोप लगा था।
उन्होंने कहा कि पालघर की घटना उसी तरह के व्यवहार की पुनरावृत्ति है। उनके मुताबिक, सत्ता में रहने वाले दल के कार्यकर्ताओं को कानून से ऊपर समझने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है।
■ डॉ. श्रीकांत शिंदे से सवाल
महेश तपासे ने शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद और पेशे से डॉक्टर डॉ. श्रीकांत शिंदे से भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या डॉ. शिंदे अपने पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित गाली-गलौज, मारपीट और धमकी का समर्थन करते हैं?
तपासे ने कहा कि सत्ता का उद्देश्य जनता की सेवा करना है, अस्पतालों में भय का माहौल पैदा करना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी पद को कानून अपने हाथ में लेने का लाइसेंस नहीं माना जा सकता।
■ सभी 17 आरोपियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
एनसीपी नेता ने मामले में नामजद सभी 17 आरोपियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी आरोपी को राजनीतिक दबाव के कारण संरक्षण न मिले।
साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों पर दबाव या हिंसा की घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।


