भोंसाला डिफेंस यूनिवर्सिटी रक्षा उत्पादन उद्योग के लिए सहायक सिद्ध होगी – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस।

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• भोंसाला डिफेंस यूनिवर्सिटी को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ चर्चा

• अंतरराष्ट्रीय शोध और विशेषज्ञ मानव संसाधन निर्माण पर विशेष जोर.

मुंबई वार्ता संवाददाता

रक्षा उत्पादन क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। साथ ही तीन केंद्रीय डिफेंस कॉरिडोर बन रहे हैं। ऐसे में रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक तकनीक आधारित विशेषज्ञ और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए भोसले डिफेंस यूनिवर्सिटी का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। विश्वविद्यालय को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए, ऐसी सलाह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज यहाँ दी।

सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन संस्थान की ओर से नागपुर में भोंसाला डिफेंस यूनिवर्सिटी शुरू हो रही है। रक्षा विषयक विश्वविद्यालय कैसा होना चाहिए तथा देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में इसकी भूमिका क्या हो सकती है, इस संदर्भ में देश के नामचीन उद्योजकों, रक्षा उत्पादन क्षेत्र के विशेषज्ञों तथा भारतीय रक्षा दल के अधिकारियों के साथ एक दिवसीय चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र के समारोप अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस बोल रहे थे।

इस अवसर पर एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया, एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी, जनरल मनोज पांडे, एयर मार्शल शिरीष देव, ले. जनरल डॉ. राजेंद्र निम्भोरकर, ले. जनरल डॉ. माधुरी कान्हेतकर, प्रा. अनिल सहस्त्रबुद्धे, बाबासाहेब एन. कल्याणी, सत्यनारायण नुवाल, डॉ. जयजीत भट्टाचार्य, नितिन गोखले, डॉ. विजय चौथाईवाले, एड. सुनील मनोहर, श्रीहरी देसाई, प्रा. मकरंद कुलकर्णी, महेश दाबक, आशिष कुलकर्णी, नारायण रामास्वामी, संस्थान के उपाध्यक्ष शैलेश जोगळेकर, राहुल दीक्षित आदि उपस्थित थे।

भोंसाला डिफेंस यूनिवर्सिटी की स्थापना करते समय रक्षा उत्पादन के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लिया जा रहा है। विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम, अनुसंधान और विशेषज्ञ मानव संसाधन निर्माण के संदर्भ में अनेक सुझाव प्राप्त हुए। भारत के रक्षा उत्पादन और अनुसंधान क्षेत्र में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ऐसी अपेक्षा व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विविध पाठ्यक्रम शामिल किए जाएँ। वैश्विक स्तर पर रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक की माँग तेजी से बढ़ रही है। इस क्षेत्र में उत्पादन की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आईआईटी मुंबई की तरह ही यह विश्वविद्यालय भी विश्वस्तरीय संस्थान बने, यही इसकी स्थापना का उद्देश्य है।

रक्षा क्षेत्र में उच्च तकनीक वाली संस्था के रूप में भोंसाला डिफेंस यूनिवर्सिटी का विकास करते समय भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर यहाँ नवोन्मेषी अनुसंधान हो, ऐसी अपेक्षा व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय रक्षा उत्पादन उद्योगों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा क्षेत्र में उत्पादनों के साथ-साथ निर्यात को भी प्रोत्साहन दिया है। इसके कारण नागपुर में रक्षा उत्पादन उद्योगों की शुरुआत हुई है। नागपुर रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन रहा है, इसलिए इस विश्वविद्यालय को विशेष महत्व प्राप्त होगा, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा।

भोसले डिफेंस यूनिवर्सिटी की स्थापना और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चा सत्र आयोजित किया गया था। रक्षा उत्पादन करने वाली विभिन्न संस्थाओं ने अपेक्षा जताई कि विश्वविद्यालय के माध्यम से इस क्षेत्र को सहायक पाठ्यक्रम तैयार किए जाएँ। विश्वविद्यालय ने स्नातक, डिप्लोमा और मास्टर प्रोग्राम तैयार किए हैं जिनमें रक्षा उत्पादन व तकनीक, लीडरशिप एंड मैनेजमेंट, इनोवेशन एंड डिजाइन, इंटरनेशनल रिलेशन एंड पब्लिक पॉलिसी तथा नॉन कन्वेंशनल डिफेंस स्टडी जैसे पाठ्यक्रमों का समावेश करने का सुझाव दिया गया।

भोसले एजुकेशन संस्थान के उपाध्यक्ष शैलेश जोगळेकर ने कहा कि लगभग 52 एकड़ परिसर में डिफेंस यूनिवर्सिटी की शुरुआत हो रही है। इसमें रक्षा, उत्पादन और अनुसंधान से संबंधित पाठ्यक्रम शामिल होंगे। यहाँ सुसज्ज प्रयोगशालाएँ और टेस्टिंग फील्ड उपलब्ध होंगी और इसे देश के अग्रगण्य विश्वविद्यालयों में विकसित करने का लक्ष्य है। कार्यक्रम की शुरुआत में एड. अविनाश भिड़े ने स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय की स्थापना और भूमिका के संदर्भ में एयर मार्शल एस.बी. देव ने जानकारी दी। आभार उपाध्यक्ष शैलेश जोगळेकर ने व्यक्त किया।

इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष सूर्यरतन डागा, सदस्य दिलीप चव्हाण, रतन पटेल, सचिव राहुल दीक्षित, कोषाध्यक्ष संजय जोशी, कर्नल अमरेंद्र हरदास, सारंग लखानी, हेमंत देशपांडे, मानशी गर्ग आदि उपस्थित थे।

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