मुंबई वार्ता संवाददाता

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के निर्देशों के अनुसार 50 किलो से अधिक वजन वाले कृषि माल की पैकिंग और ढुलाई नहीं करने के फैसले से माथाड़ी (हमाल) मजदूरों को बड़ी राहत मिली है। अब उनके सिर पर उठाया जाने वाला बोझ कम होगा।


राज्य सरकार के निर्देश के बाद सभी कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं, और किसानों व व्यापारियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।


दरअसल, ILO की हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 50 किलो से अधिक वजन का माल हाथ से उठवाना नहीं चाहिए।
केंद्र सरकार ने इस निर्णय को लागू करने के लिए राज्यों को निर्देश दिए थे।
इसके अनुसार, राज्य के श्रम आयुक्त ने पहले भी 11 अगस्त 2000 को परिपत्र जारी किया था और बाद में उद्योग, ऊर्जा व श्रम विभाग ने 30 सितंबर 2010 को भी इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए थे।
हाल ही में 1 अप्रैल 2026 को मंत्रालय में राज्य के विपणन मंत्री जयकुमार रावल की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें श्रमिक संगठनों, व्यापारी संघों और संबंधित विभागों ने भाग लिया।
बैठक में बताया गया कि प्याज, आलू और अन्य कृषि उत्पादों की ढुलाई में अक्सर 50 किलो से अधिक वजन की बोरियां उठानी पड़ती हैं, जिससे मजदूरों को शारीरिक परेशानी होती है। इस पर सभी पक्षों ने सहमति जताई कि बोरियों का वजन 50 किलो तक सीमित किया जाए।
अब राज्य की सभी कृषि उपज मंडी समितियां किसानों और व्यापारियों के बीच इस नियम को लेकर जागरूकता अभियान चलाएंगी, ताकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


