मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राज्य में मीठे पानी और समुद्री मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए मछुआरों को प्रशिक्षण देने का निर्णय मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने लिया है।
मंत्रालय में आज मत्स्य उत्पादन वृद्धि और मछुआरों के कौशल विकास, रोजगार और इस व्यवसाय में नवाचार लाने की दृष्टि से समाधान निकालने के लिए बैठक हुई। इस बैठक में मत्स्य व्यवसाय आयुक्त किशोर तावड़े, सकाळ ग्रुप के बॉबी निंबालकर आदि उपस्थित थे।
छत्रपती संभाजीनगर जिले में प्रायोगिक आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश देते हुए मंत्री नीतेश राणे ने कहा कि, तटीय एक जिले में भी यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रायोगिक आधार पर चलाया जाए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मत्स्य व्यवसाय आयुक्त कार्यालय द्वारा मूल्यांकन किया जाए और इस प्रशिक्षण के माध्यम से मत्स्य उत्पादन में कितनी और कैसे वृद्धि हुई है, मछुआरों को किस प्रकार लाभ हुआ है, इसका इस मूल्यांकन में समावेश होना चाहिए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए विभाग द्वारा उन जिलों की नियोजन समिति के निधि से प्रावधान किया जाए, ऐसी सूचनाएं भी मंत्री नीतेश राणे ने दी।
मंत्री नीतेश राणे ने कहा कि, पालघर जिले में बनाए जा रहे वाढवण बंदर 2026 तक कार्यान्वित होने वाला है। इस वाढवण बंदर के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन निर्माण के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया जाए और इसे तुरंत लागू करने की योजना बनाई जाए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए मुख्य रूप से तटीय जिलों को प्राथमिकता दी जाए। जिससे तटीय क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इसके लिए भी जिला नियोजन समिति के निधि से प्रावधान करने के लिए विभाग द्वारा पहल की जाए। सिंधुदुर्ग जिले में इस प्रकार जिला नियोजन समिति के निधि से प्रावधान किया जाएगा। वाढवण बंदर के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है। इसे राज्य से ही पूरा करने के लिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उपयोग किया जाएगा।
इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की जाए, ऐसी सूचनाएं मंत्री नीतेश राणे ने दी।मछुआरों के लिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में सतत मछली पकड़ने का व्यवसाय, पर्यावरण अनुकूल मछली पकड़ने, मछुआरों को व्यवसाय में आने वाली समस्याओं का समाधान, उनकी सुरक्षा, आधुनिक तकनीक का उपयोग आदि शामिल होंगे।


