श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे ने पत्रकार सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य में विद्यार्थियों को तीसरी भाषा के रूप में हिन्दी सीखने पर सरकार मजबूर कर रही है। हिंदी को महाराष्ट्र में विद्यार्थियों पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है…. ब्लाह..ब्लाह…ब्लाह………ब्लाह। सारे किए धरे पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने बयान देकर पानी फेर दिया।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि,” नए सरकारी निर्णय अनुसार महाराष्ट्र में तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में सिर्फ हिंदी ही नहीं अपितु हिन्दुस्थान की किसी भी अन्य भाषा को सीखने का प्रावधान किया गया है।”
ज्ञात हो कि महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव नजदीक है। चुनाव लड़ने के लिए लोगों के बीच जाना होगा। जिन्होंने कभी जनहित में कोई काम नहीं किया ऐसे लोगों को जनता को रिझाने के लिए मुद्दा चाहिए।


यह जगजाहिर है कि भोली भाली जनता को आकर्षित करने के लिए सूड राजनीतिज्ञ भाषा-धर्म-जाती-समुदाय को मुद्दा बनाते रहे हैं। क्योंकि लोगों की भावना इससे जुड़ी होती है और राजनीति में भावना ही एक ऐसी चाल है जो किसी भी राजनीतिक हवा को बदल सकती है।
भाषावाद को सहारा बना कर चुनावी रण में उतरने की कोशिश कर रहे राज ठाकरे शायद भूल गए कि उनका पाला हवा हवाई कॉंग्रेस पार्टी से नहीं अपितु सत्तासीन कॉंग्रेस को धूल चटाकर, शून्य से शिखर पर पहुंची भारतीय जनता पार्टी से पड़ा है।
राज ठाकरे ने आज एक बार फिर मराठी भाषा को मुद्दा बनाकर प्रेस कांफ्रेंस की…. सरकार के खिलाफ बयानबाजी की। हिन्दुत्व का मुद्दा खो चुकी उबाठा(शिवसेना) ने भी तुरंत टेलीविजन पर प्रवक्ताओं को भेजकर मनसे का समर्थन किया। दोपहर तक न्यूज चैनलों पर भी खूब हवा बाजी हुई। लेकिन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के एक बयान ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया।


