■ बोले – मुंबई में मराठी को डावलने वालों के लिए जगह नहीं.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका की विधि समिति के सदस्य और नगरसेवक तजिंदर सिंह तिवाना ने शहर में मराठी नामफलक नियमों की खुलेआम अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद मुंबई के हजारों दुकानों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब भी मराठी नामफलक नहीं लगाए गए हैं, लेकिन प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहा है।


हरकती के मुद्दे के जरिए प्रशासन को घेरते हुए तिवाना ने सवाल किया कि जब मराठी नामफलक को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तब प्रशासन आखिर कर क्या रहा है? उन्होंने निरीक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या अधिकारियों को अपने विभागों में लगे बड़े-बड़े अंग्रेजी बोर्ड दिखाई नहीं देते या फिर वे जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।


तिवाना ने आरोप लगाया कि मुंबई में बड़ी संख्या में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना मराठी नामफलक के संचालित हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन केवल नोटिस देकर औपचारिकता निभा रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर कितने प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाया गया और कितनों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि The Westin Mumbai Garden City और Morgan Stanley जैसी बड़ी कंपनियों और प्रतिष्ठानों पर केवल अंग्रेजी में नाम प्रदर्शित किए जा रहे हैं। तिवाना ने सवाल उठाया कि क्या बड़े कॉर्पोरेट और आलीशान होटलों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं।
उन्होंने फिल्म कलाकारों के रूफटॉप होटलों और महंगे रेस्टोरेंट्स में भी मराठी नामफलक नियमों का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सामान्य दुकानदारों पर नियम लागू किए जाते हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों को खुली छूट दी जाती है।
तिवाना ने मांग की कि मराठी नामफलक नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर अंग्रेजी नाम बड़े अक्षरों में और मराठी नाम बेहद छोटे अक्षरों में लिखकर नियमों का मजाक उड़ाया जा रहा है।
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि मराठी भाषा का सम्मान केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई में भी दिखाई देना चाहिए, अन्यथा नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।


