मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार द्वारा पेश किए गए 2026 के बजट को लेकर अमोल मातेले ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकसित महाराष्ट्र बनाने का नहीं, बल्कि केवल घोषणाओं का महाराष्ट्र बनाने वाला बजट है।


राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश प्रवक्ता और युवक मुंबई अध्यक्ष एड. अमोल मातेले ने कहा कि सरकार ने बजट में प्रगतिशील, शाश्वत, सर्वसमावेशी और सुशासन जैसे चार स्तंभों की घोषणा तो की है, लेकिन वास्तविकता में यह बजट “नाम बड़े और दर्शन छोटे” जैसा साबित हो रहा है।
मातेले ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा की है, लेकिन आज भी किसान बिजली, पानी, न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्ज की समस्याओं से जूझ रहा है। उनके मुताबिक, इन घोषणाओं की स्थिति “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी है और सरकार किसानों के नाम पर सिर्फ राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया है, लेकिन इसके बावजूद राज्य पर आर्थिक बोझ और घाटा लगातार बढ़ रहा है। मातेले ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक नीति ऐसी है जैसे “घर चलाने के लिए पैसे नहीं, लेकिन महल बनाने की घोषणाएं की जा रही हैं।”मुंबई और महानगरों के विकास के लिए मेट्रो, सागरी सेतु और ग्रीनफील्ड शहरों जैसी बड़ी परियोजनाओं की घोषणाएं की गई हैं, लेकिन आम नागरिकों को पीने के पानी, घर और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट “ढोल बड़ा, लेकिन आवाज खोखली” जैसा है।
युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना करते हुए मातेले ने कहा कि स्टार्टअप, एजु-सिटी और उद्यमिता को बढ़ावा देने की बातें तो की गई हैं, लेकिन युवाओं को वास्तविक रोजगार देने के लिए स्पष्ट आर्थिक प्रावधान नहीं दिखाई देते।
मातेले ने आरोप लगाया कि यह बजट जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया बजट है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता को अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि विकास का ठोस हिसाब चाहिए।


