महाराष्ट्र में सूखा घोषित, फिर भी किसानों को राहत नहीं मिली: सुप्रिया सुले का आरोप; खडकवासला में 2.5 लाख मतदाता कम होने का दावा, जांच की खुली चुनौती।

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■ ‘केवल इस्तीफे से समस्या नहीं सुलझेगी, चुनावी व्यवस्था में बदलाव जरूरी’; महंगाई, बेरोजगारी और कथित वोट चोरी को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना।

मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में सूखा घोषित किए जाने के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी चिंता जताई। इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कथित वोट चोरी का आरोप दोहराते हुए उन्होंने अपने बारामती लोकसभा क्षेत्र से जांच शुरू करने की खुली चुनौती दी। सुप्रिया सुले ने कहा कि जब महंगाई बढ़ रही है और किसानों को सहायता नहीं मिल रही है, तो आम लोग अपना जीवन कैसे चलाएं?


नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने सूखा घोषित कर दिया है, लेकिन किसानों को अब तक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सूखे के मुद्दे पर संघर्ष कर रही है। महंगाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे में आम नागरिकों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो रहा है।

■ जंतर-मंतर पर 14 वर्षीय लड़के को रोके जाने का मुद्दा उठाया


सुप्रिया सुले ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक 14 वर्षीय लड़के को पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने की घटना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, लड़के ने पुलिस से सवाल किया कि क्या उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा और कानून के तहत लागू निषेधाज्ञा संबंधी प्रावधानों की जानकारी नहीं है। लड़के ने कथित तौर पर कहा कि वह अकेले जा रहा है और उसे रोका नहीं जा सकता।


सुप्रिया सुले ने सवाल उठाया कि एक अकेले नाबालिग लड़के को पुलिस क्यों रोक रही थी और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे क्या कारण था। उन्होंने चिंता जताई कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और क्या परिस्थितियां आपातकाल जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही हैं।


■ चुनाव आयोग की जवाबदेही पर उठाए सवाल


सुप्रिया सुले ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, लेकिन इसके बावजूद लोग उसके कामकाज के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सत्ताधारी पक्ष को ऐसी स्थिति में नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए।


उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से न्याय मांगने के लिए विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दिया और राष्ट्रपति के समक्ष भी अपनी बात रखी, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक न्याय नहीं मिला है। सुले ने कहा कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि चुनावी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।


■ बारामती और खडकवासला में मतदाताओं की संख्या पर सवाल


लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कथित वोट चोरी को लेकर अपने आरोपों पर कायम रहते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि उनके बारामती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से जांच शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पक्ष उनसे सवाल करता है कि यदि वह लोकसभा चुनाव जीतकर आई हैं, तो फिर वोट चोरी कैसे हुई।


इसके जवाब में उन्होंने अपनी ही लोकसभा सीट से जांच शुरू करने की चुनौती दी। सुले के मुताबिक, बारामती लोकसभा क्षेत्र के खडकवासला विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में बड़े पैमाने पर अंतर सामने आया है।


उन्होंने दावा किया कि बारामती लोकसभा क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग सात लाख मतदाताओं की कमी हुई, जबकि अकेले खडकवासला विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.5 लाख मतदाता कम हो गए। उन्होंने सवाल किया कि ये मतदाता कहां गए और मतदाता सूची से उनके नाम किस आधार पर हटाए गए।
सुप्रिया सुले ने कहा कि संबंधित मतदाता सूचियां सार्वजनिक की जानी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने नाम हटाए गए, कितने नए नाम जोड़े गए और इसके पीछे क्या कारण थे।

■ मतदाता सूची की जांच के लिए तैयार


सुप्रिया सुले ने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में बदलाव हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी और जिन क्षेत्रों में घटी, दोनों की जांच की जा सकती है।


उन्होंने अपने दावे के समर्थन में खडकवासला विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में लगभग पांच लाख मतदाता थे, जबकि विधानसभा चुनाव के समय मतदाताओं की संख्या में करीब 50 हजार की वृद्धि हुई। इसके बाद मतदाता सूची में फिर लगभग 2.5 लाख की कमी होने का दावा करते हुए उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मतदाता कहां चले गए।


सुले ने कहा कि इसके पीछे दोहरे नाम, लोगों का घर बदलना या अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन इनकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने संबंधित आंकड़ों और मतदाता सूची की जांच की मांग की। ये आंकड़े और कथित अनियमितताओं के आरोप सुप्रिया सुले के बयान पर आधारित हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।


■ बेरोजगारी और महंगाई पर भी सरकार को घेरा


सुप्रिया सुले ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई बढ़ने की बात आंकड़ों से सामने आती है। उनके अनुसार, किसानों की समस्याएं, सूखा, बेरोजगारी, महंगाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल देश के सामने गंभीर चुनौतियां हैं, लेकिन सत्ताधारी पक्ष इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं दिखता।
उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान बातचीत और चर्चा के माध्यम से होना चाहिए। विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सत्ताधारी पक्ष को भी आगे आना चाहिए।


सुप्रिया सुले ने दोहराया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच की जाए, किसानों को राहत दी जाए और महंगाई तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार ठोस कदम उठाए।

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