■ एल नीनो और हिंद महासागर द्विध्रुव के प्रभाव से 2026 में कम बारिश के कारण सातों झीलों के जलस्तर पर असर; पानी की बर्बादी रोकने की बीएमसी की अपील, दुरुपयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में कम बारिश और संभावित जल संकट को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने नागरिकों से पानी का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करने और पानी की बर्बादी रोकने की अपील की है। महानगरपालिका के अनुसार, वर्ष 2026 में एल नीनो और हिंद महासागर द्विध्रुव (इंडियन ओशन डाइपोल) जैसे मौसमी कारकों के प्रभाव से कम बारिश हुई है। इसका असर मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाली सातों झीलों के जल भंडार पर पड़ा है। ऐसे में उपलब्ध पानी को लंबे समय तक बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।


बीएमसी प्रशासन ने बताया कि मुंबई शहर और उपनगरों को प्रतिदिन लगभग 4,664 मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि उपलब्ध जल स्रोतों से औसतन 4,100 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के अनुसार, 15 मई 2026 से मुंबई में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू की गई है। यह कटौती अभी भी जारी है।
महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के मुताबिक, भविष्य में पेयजल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 31 अगस्त 2027 तक की अवधि के लिए पानी की उपलब्धता और आपूर्ति का नियोजन करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके मद्देनजर बीएमसी ने पानी बचाने के लिए अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं।
■ स्विमिंग पूल में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक
बीएमसी ने नागरिकों, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न संस्थाओं से पीने के पानी का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। स्विमिंग पूल के लिए पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया है। पेयजल के अलावा अन्य कार्यों के लिए कुओं, कूपनलिकाओं और बोरवेल जैसे वैकल्पिक जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग करने को कहा गया है।
औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और स्पोर्ट्स क्लबों को होने वाली पानी की आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती भी जारी रहेगी।
उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़कों की धुलाई की जाती है। बीएमसी ने इसके लिए पीने के पानी के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। इसी तरह निर्माण स्थलों पर भी पीने के पानी के अतिरिक्त अन्य कार्यों के लिए उपचारित पानी अथवा बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
वाहनों की धुलाई, उद्यानों में पेड़-पौधों को पानी देने तथा सड़कों और आसपास के परिसरों की सफाई के लिए भी कुओं, कूपनलिकाओं और बोरवेल के पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक शौचालयों और प्रसाधनगृहों का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं से भी यथासंभव वैकल्पिक जल स्रोतों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।
■ पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष दल गठित
पानी की पाइपलाइनों में रिसाव के कारण होने वाले नुकसान को रोकने के लिए बीएमसी के जल अभियंता विभाग ने विशेष दल गठित किए हैं। इन दलों को पानी के रिसाव की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर और निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध जल भंडार का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और पानी की बर्बादी को कम करना है।
■ पानी का दुरुपयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई
बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महानगरपालिका की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले पीने के पानी का किसी भी स्थान पर या किसी भी प्रकार से दुरुपयोग होते पाए जाने पर संबंधित लोगों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों और सभी संबंधित संस्थाओं से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
■ रोजमर्रा की आदतों में बदलाव जरूरी
बीएमसी ने नागरिकों से घरों में नल बेवजह खुला नहीं छोड़ने, नलों और जलापूर्ति की पाइपलाइनों में रिसाव होने पर तत्काल मरम्मत कराने तथा वाहन और परिसर की सफाई में जरूरत से ज्यादा पानी खर्च नहीं करने का आग्रह किया है। जहां संभव हो, वहां वैकल्पिक जल स्रोतों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है।
प्रशासन के अनुसार, पानी बचाना केवल राज्य सरकार या महानगरपालिका की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति यदि रोजाना थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी बचाए, तो इससे पूरे महानगर के जल भंडार को लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
बीएमसी ने मुंबईकरों से अपील की है कि वे पानी के महत्व को समझें, पेयजल का इस्तेमाल केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें और पानी की हर बूंद को अनमोल मानते हुए उसकी बर्बादी रोकने का संकल्प लें। प्रशासन का संदेश है—‘पानी बचाएं, जीवन बचाएं।’


