मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र विधानसभा ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह विधेयक हाल ही में विधानसभा और विधान परिषद—दोनों सदनों से मंजूर हुआ है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।


यह संशोधन पहले प्रस्तावित शक्ति क्रिमिनल लॉ संशोधन विधेयक 2020 के कुछ प्रावधानों को वर्तमान आपराधिक कानून ढांचे में शामिल करता है। शक्ति बिल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सख्त सजा और तेज जांच-ट्रायल का प्रावधान था, लेकिन केंद्र द्वारा नए कानून लागू होने के बाद इसे लागू नहीं किया गया था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संशोधन को “ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपराधों का स्वरूप भी बदल गया है, खासकर सोशल मीडिया और तकनीक के विस्तार के साथ, इसलिए कानूनों को डिजिटल अपराधों को भी कवर करना जरूरी है।
■ क्या हैं प्रमुख प्रावधान
1. डिजिटल यौन उत्पीड़न को अपराध की श्रेणी में शामिल
संशोधन के तहत अब ऑनलाइन माध्यम से होने वाले यौन उत्पीड़न को भी स्पष्ट रूप से अपराध माना जाएगा। इसमें अश्लील संदेश भेजना, निजी फोटो/वीडियो साझा करने की धमकी देना, सोशल मीडिया पर उत्पीड़न जैसे कृत्य शामिल हैं।
2. एसिड अटैक पीड़ितों की पहचान उजागर करना अपराध
पहले यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा का प्रावधान था, लेकिन अब एसिड अटैक पीड़ितों को भी इसी सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। उनकी पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध होगा।
■ विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका असर पूरी तरह इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
एडवोकेट जय वैद्य ने कहा कि कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से लागू होना जरूरी है, तभी जांच और ट्रायल मजबूत होंगे।
वहीं, एडवोकेट अभा सिंह ने इसे “महिलाओं की गरिमा और निजता की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम” बताया, खासकर एसिड अटैक पीड़ितों की पहचान सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।
हालांकि, मजलिस की निदेशक एडवोकेट ऑड्रे डी’मेलो ने इस दावे पर सवाल उठाए कि यह संशोधन शक्ति कानून के प्रमुख हिस्सों को वापस लाता है। उनका कहना है कि संशोधन में केवल दो मुख्य बदलाव किए गए हैं और शक्ति कानून के कई विवादित प्रावधान इसमें शामिल नहीं हैं।
संभावित चुनौतियां
कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल अपराधों की व्यापक परिभाषा का दुरुपयोग भी हो सकता है, खासकर व्यक्तिगत विवादों में। ऐसे में कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और मजबूत साक्ष्य मानक जरूरी होंगे।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दुरुपयोग रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। अब यह देखना अहम होगा कि सख्त कानून और उसके निष्पक्ष इस्तेमाल के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है।
कुल मिलाकर, यह संशोधन महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा और डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


