मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए चौथी महिला नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। संबंधित बैठक में यह कहा गया कि सखी केंद्रों और महिला आश्रय स्थलों में एक समान और प्रभावी सेवा प्रणाली विकसित करना आवश्यक है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को बेहतर सहायता मिल सके।


बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसमें चैरिटेबल संस्थाओं के पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना, न्यायालयीन मामलों के आधार पर महिलाओं को योजनाओं का लाभ देना, परिवार परामर्श केंद्रों को मिलने वाले अनुदान में वृद्धि करना और पुलिस थानों में विशेष प्रकोष्ठों के काउंसलरों के मानदेय बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे।
इसके साथ ही निर्देश दिए गए कि घरेलू हिंसा मामलों के लिए ‘सर्विस प्रोवाइडर’ पंजीकरण प्रणाली को अगले तीन महीनों के भीतर फिर से शुरू किया जाए। वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर (One Stop Crisis Center) के कामकाज की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में यह भी सिफारिश की गई कि जिला नियोजन समिति (District Planning Committee) के कुल बजट का कम से कम तीन प्रतिशत हिस्सा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े तंत्र पर खर्च किया जाए।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और इन व्यवस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।


