मातृभाषा के साथ जिस राज्य में रह रहे हैं, वहां की भाषा भी आनी चाहिए : विधायक संजय उपाध्याय।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

अपनी मातृभाषा पर गर्व करने के साथ-साथ जिस राज्य और समाज में व्यक्ति रह रहा है, वहां की स्थानीय भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए। एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ सामाजिक और व्यावहारिक जीवन में आगे बढ़ने में भी मदद करता है। यह बात बोरीवली के भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांदिवली-चारकोप स्थित श्री दयानंद विद्यालय में आयोजित अंतरविद्यालयीन वक्तृत्व प्रतियोगिता के दौरान कही।


विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए संजय उपाध्याय ने कहा कि भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और समाज से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति मराठी या गुजराती जैसी स्थानीय भाषा में लोगों से संवाद करता है, तो सामने वाला व्यक्ति अधिक सहज महसूस करता है और आपसी आत्मीयता बढ़ती है।


उन्होंने डॉक्टर और मरीज का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर भले ही अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करता हो, लेकिन यदि वह मरीज की परेशानी उसकी भाषा में नहीं समझ पाएगा तो इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हिंदी, मराठी या गुजराती जैसी स्थानीय भाषा में मरीज की समस्या को समझने वाला डॉक्टर उसके साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि एक कुशल चिकित्सक के लिए मरीज की भाषा के साथ-साथ उसकी भावनाओं और मन की बात समझना भी महत्वपूर्ण है।
विधायक ने क्षेत्रीय भाषाओं के स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज में यह धारणा बढ़ रही है कि अंग्रेजी के बिना प्रगति संभव नहीं है, जबकि ऐसा नहीं है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई स्थानीय भाषाओं में कराने की दिशा में भी पहल की जा रही है।


अपने संबोधन के दौरान संजय उपाध्याय ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आज कई लोग अपने पालतू जानवरों से भी अंग्रेजी में बात करते हैं, मानो वे किसी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल से पढ़कर आए हों। उन्होंने कहा कि कई बार लोग हीनभावना के कारण अपने परिवार और रिश्तों के लिए भी अंग्रेजी संबोधन का इस्तेमाल करने लगते हैं।


उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा के साथ-साथ स्थानीय और अन्य भाषाएं सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंसान सामान्यतः अपनी मातृभाषा में सोचता है और अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। साथ ही आसपास की भाषाओं का ज्ञान हासिल करने से अलग-अलग समाज और समुदाय के लोगों से संवाद करना आसान होता है। आधुनिक तकनीक और मोबाइल सुविधाओं ने विभिन्न भाषाओं को समझने और अनुवाद करने की प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है।


अंतरविद्यालयीन वक्तृत्व प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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