मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था से सीधे जुड़े मिठी नदी की डीसिल्टिंग को लेकर स्थायी समिति की बैठक में गंभीर सवाल उठाए गए। स्थायी समिति सदस्य और नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने बैठक में पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए इस वर्ष डीसिल्टिंग के काम में लगभग 40 प्रतिशत कमी किए जाने पर आपत्ति जताई।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने इस वर्ष मिठी नदी से गाद निकालने का लक्ष्य कम कर दिया है। पिछले वर्ष लगभग 2.67 लाख टन गाद निकालने का लक्ष्य था, जिसे इस साल घटाकर 1.65 लाख टन कर दिया गया है। इसके साथ ही इस काम का बजट भी 48 करोड़ रुपये से घटाकर 29.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना ने कहा कि यदि इस वर्ष 40 प्रतिशत कम डीसिल्टिंग करने के बावजूद शहर में बाढ़ की स्थिति नहीं बनती, तो पिछले कई वर्षों से इतनी बड़ी मात्रा में गाद निकालने के अनुमान किस वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर लगाए गए थे। उन्होंने मांग की कि पिछले दस वर्षों की पूरी डीसिल्टिंग प्रक्रिया की जानकारी के साथ एक व्हाइट पेपर सदन के सामने पेश किया जाए।


तिवाना ने यह भी कहा कि यदि ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से हिचक रहे हैं, तो महानगरपालिका को अपनी स्वयं की व्यवस्था विकसित कर यह काम सीधे करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्थायी रूप से “डीसिल्टिंग टास्क फोर्स” या अलग विभाग बनाने का भी सुझाव दिया।उन्होंने डीसिल्टिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए हाइड्रोलॉजिकल सर्वे, जीपीएस ट्रैकिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग और निकाली गई गाद के वजन की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग की।
बैठक के दौरान स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने इस हरकती के मुद्दे को सुरक्षित रखते हुए प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही मुंबई महानगरपालिका आयुक्त से पिछले दस वर्षों में मिठी नदी में हुई डीसिल्टिंग पर व्हाइट पेपर पेश करने के निर्देश दिए।मुंबईकरों की सुरक्षा और मानसून के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इस मुद्दे पर प्रशासन से जल्द स्पष्ट जवाब देने की मांग की गई है।


