मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-2 के पास स्थित एक मस्जिदनुमा धार्मिक संरचना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में संरचना की वैधता और आवश्यक अनुमतियों को लेकर सवाल उठे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित प्राधिकरणों की ओर से इसे हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद मौके पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।


मामला तब सुर्खियों में आया जब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने एयरपोर्ट परिसर के पास बनी इस संरचना को कथित तौर पर अनधिकृत बताते हुए इसे हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। सोमैया ने संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और तत्काल कार्रवाई की मांग भी की है।


रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी एमएमआरडीए की ओर से इस संरचना के लिए अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को कथित अनधिकृत संरचना को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पूरे मामले ने अब धार्मिक संरचनाओं के निर्माण, सरकारी अनुमति और एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर बहस छेड़ दी है। एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास किसी भी निर्माण के लिए निर्धारित नियमों तथा सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन जरूरी माना जाता है।
मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि संबंधित संरचना को हटाने के आदेश या निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं, तो जमीन पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विवाद के बीच अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि किसी भी कार्रवाई को कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अंजाम दिया जाए, ताकि सुरक्षा, प्रशासनिक नियमों और कानूनी प्रक्रिया—तीनों का पालन सुनिश्चित हो सके। मुंबई एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण इस मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


