मुंबई का डॉक्टर गिरफ्तार: गुजरात से मुंबई तक फैले नवजात तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, 8 दिन के मासूम की ₹3 लाख में हो रही थी सौदेबाजी।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

गुजरात के वडोदरा क्राइम ब्रांच ने गुजरात के पाटन जिले से मुंबई तक फैले कथित नवजात शिशु तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मुंबई के एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कुछ दिन पहले 8 दिन के एक नवजात शिशु को ₹3 लाख में बेचे जाने से बचाया था। इसी मामले की जांच के दौरान सामने आए सुरागों के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई।


गिरफ्तार आरोपी की पहचान डॉ. सचिन देव महावीर नागनाथ लोखंडे के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र के अंबरनाथ का निवासी है। अदालत ने आरोपी डॉक्टर को आगे की पूछताछ के लिए 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
8 दिन के नवजात की बिक्री से खुला पूरा मामला


पुलिस के अनुसार, वडोदरा क्राइम ब्रांच ने सिद्धपुर निवासी मनोज रावल और वीणा रावल को उस समय पकड़ा, जब वे 8 दिन के एक नवजात शिशु को ₹3 लाख में बेचने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने तत्काल बच्चे को सुरक्षित छुड़ाकर वडोदरा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी निगरानी और इलाज जारी है।


इस मामले में अब तक 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया कि इस गिरोह का कथित सरगना सुनील रावल है, जो मनोज रावल का साला है। पुलिस का यह भी दावा है कि बच्चे के पिता लक्ष्मण ने भी कथित तौर पर ₹2 लाख में अपने ही नवजात को बेचने पर सहमति जताई थी।
मुंबई के डॉक्टर तक ऐसे पहुंची जांच


जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों सोहेल और तौफीक, जो मुंबई के रहने वाले हैं, ने पुलिस को बताया कि वे गुजरात से नवजात को लेकर मुंबई आने वाले थे और उसे डॉ. लोखंडे के हवाले करना था।


आरोपियों के बयान और सुनील रावल के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने अंबरनाथ निवासी डॉ. लोखंडे को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, वह अंबरनाथ के बालाजी अस्पताल और भिवंडी के नजमा अस्पताल में कार्यरत था।

■ डॉक्टर की डिग्री और भूमिका की जांच


शुरुआत में पुलिस को संदेह था कि आरोपी डॉक्टर किसी स्त्री रोग अस्पताल का संचालक है, लेकिन पूछताछ में पता चला कि वह एमबीबीएस डॉक्टर है, स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) नहीं।


फिलहाल एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) उसकी शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।

■ किसे सौंपा जाना था बच्चा, पुलिस कर रही जांच


पुलिस का आरोप है कि डॉ. लोखंडे को नवजात शिशु को कुछ दिनों तक अपने पास रखने के बाद एक महिला को सौंपना था। अब जांच एजेंसियां उस महिला की पहचान, लेन-देन में शामिल रकम और डॉक्टर की वास्तविक भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।


जांच में यह भी सामने आया है कि इससे पहले भी एजेंट सुनील रावल ने एक अन्य बच्चे का सौदा डॉ. लोखंडे से कराने की कोशिश की थी, लेकिन डॉक्टर ने उसे लेने से इनकार कर दिया था।


पुलिस ने डॉक्टर और सुनील रावल के मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

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